अब डॉ. शाहीन का तब्लीगी जमात से मिला कनेक्शन, 100 से अधिक लोगों पर सुरक्षा एजेंसियों की नजर

Curated By: Shiv Vishwakarma | Hindi Now Uttar Pradesh • 16 Nov 2025, 07:17 pm
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दिल्ली कार ब्लास्ट के बाद उत्तर प्रदेश के कानपुर से गिरफ्तार डॉ. शाहीन को लेकर अब एक और बड़ा खुलासा हुआ है। तब्लीदी जमात से उसके सीधे कनेक्शन मिले हैं। इस मामले में अब सुरक्षा एजेंसियों ने अपनी जांच तेज कर दी है। आइये पूरा अपडेट जानते हैं।

दिल्ली में लाल किले के पास कार ब्लास्ट मामले में गिरफ्तार साजिशकर्ता डॉ. शाहीन, उसके भाई डॉ. परवेज और उनके साथियों के तब्लीगी समाज से जुड़े होने के महत्वपूर्ण इनपुट खुफिया विभाग को मिले हैं। एजेंसियां इस नेटवर्क की गहराई में जाकर उन कड़ियों की जांच कर रही हैं, जिनके माध्यम से कट्टरपंथी गतिविधियों को संचालित किया जा रहा था। दिल्ली, लखनऊ और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सौ से अधिक लोग वर्तमान में एजेंसियों की निगरानी में हैं।


सूत्रों के मुताबिक डॉ. परवेज और उसकी बहन डॉ. शाहीन के मोबाइल फोन व घर से बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में कई अहम सबूत मिले हैं, जो उनके कट्टरपंथी समूहों से संपर्क की पुष्टि करते हैं। इंटीग्रल विश्वविद्यालय में पढ़ाने वाले डॉ. परवेज के जमात से जुड़े मौलवियों और अन्य लोगों से लगातार संपर्क में रहने की जानकारी मिली है। वह उनकी मदद से कुछ स्लीपर सेल तैयार करने की कोशिश में था, जिन्हें समय आने पर निर्देश देने की बात भी सामने आई है। एजेंसियों द्वारा उससे यह भी पूछा जा रहा है कि वह किन लोगों से निर्देश लेकर इन स्लीपर सेल तक पहुंचाता था।


अगस्त माह में डॉ. शाहीन कई दिनों तक लखनऊ में रुकी थी। इसी दौरान परवेज ने उसकी मुलाकात तब्लीगी जमात से जुड़े व्यक्तियों से कराई। उनकी कई बैठकों के बाद परवेज ने सहारनपुर, हाथरस, हापुड़, मुरादाबाद, संभल, बिजनौर, दिल्ली और कानपुर में भी जमात से जुड़े लोगों के साथ मुलाकातें आयोजित की थीं। जांच में यह संकेत मिल रहे हैं कि भाई-बहन मिलकर एक संगठित नेटवर्क के जरिए बड़ी साजिश को अंजाम देने की तैयारी में थे।


पूछताछ में यह भी सामने आया है कि तब्लीगी जमात के कुछ लोग विस्फोट में शामिल आतंकी तत्वों के मददगार बने हुए थे। ये लोग आतंकियों को जगह-जगह ले जाने के लिए वाहन उपलब्ध कराते थे, उनके कपड़ों और रोज़मर्रा के सामान की व्यवस्था करते थे तथा जरूरत पड़ने पर विभिन्न शहरों में ठहरने का इंतज़ाम भी कराते थे। कोविड काल में भी जमात की गतिविधियां चर्चा में रही थीं, जब कई स्थानों पर गुप्त बैठकों और जमावड़ों के जरिए संक्रमण फैलने में उनकी भूमिका सामने आई थी। उस समय कैंट क्षेत्र से 12 लोगों को पुलिस ने पकड़ा था, जबकि दिल्ली में आयोजित बड़े आयोजन भी विवादों के केंद्र में रहे थे।


जमात के लोगों द्वारा बैठकों में युवाओं को जोड़ने, कट्टरपंथी साहित्य और वीडियो देकर उन्हें प्रभावित करने तथा जन्नत का रास्ता बताने के नाम पर उन्हें भटकाने के तरीके भी जांच में सामने आए हैं। ऐसी विचारधारा के प्रभाव में आकर कई युवा देश विरोधी गतिविधियों की ओर आकर्षित हो जाते हैं और आतंक के मार्ग को ही अपनी नियति समझ बैठते हैं।


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