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Hindi Now Uttar Pradesh • 03 Dec 2025, 01:07 pm
उत्तर प्रदेश में बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों के खिलाफ बड़े स्तर पर कार्रवाई शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य के 17 नगर निकायों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि जिन निकायों में रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिक काम कर रहे हैं, उनकी सूची तैयार कर तुरंत कमिश्नर और आईजी को सौंपी जाए। इसके साथ ही प्रथम चरण में प्रदेश के सभी मंडलों में डिटेंशन सेंटर बनाने का आदेश दिया गया है। निर्देश मिलते ही प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी सक्रिय हो गए हैं और कार्रवाई तेज कर दी गई है।
प्रदेश में विदेशी घुसपैठियों को पहचानकर बाहर भेजने की योजना के तहत दिल्ली मॉडल को अपनाया जा रहा है। दिल्ली की तर्ज पर यूपी के जिलों में भी डिटेंशन सेंटर स्थापित किए जाएंगे, जहां घुसपैठियों को सुरक्षित रखकर आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके लिए जिलों में खाली पड़ी सरकारी इमारतें, सामुदायिक केंद्र, पुलिस लाइन और थानों को चिन्हित किया जा रहा है ताकि उन्हें अस्थायी या स्थायी डिटेंशन सेंटर के रूप में उपयोग किया जा सके।
दिल्ली में फिलहाल करीब 18 डिटेंशन सेंटर संचालित हैं, जिनमें लगभग 1500 विदेशी नागरिक रखे गए हैं। इनमें बांग्लादेशी, रोहिंग्या तथा कुछ अफ्रीकी देशों के नागरिक शामिल हैं, जिन्होंने अवैध रूप से सीमाएं पार की हैं। कई घुसपैठियों ने भारतीय दस्तावेज भी हासिल कर लिए हैं, इसलिए उनकी पहचान और सत्यापन की प्रक्रिया भी चल रही है। डिटेंशन सेंटरों में रहने वालों को भोजन, चिकित्सा और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी रहती है। बाद में एफआरआरओ (फॉरेन रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस) के माध्यम से उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया पूरी की जाती है। पश्चिम बंगाल और असम के रास्ते बीएसएफ की मदद से इन्हें उनके देशों में वापस भेजा जाता है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय पहले ही डिटेंशन सेंटरों के संचालन के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) सभी राज्यों को भेज चुका है। उसी के तहत अब उत्तर प्रदेश में भी इन सेंटरों का निर्माण किया जाएगा। इनके संचालन, प्रबंधन और सुरक्षा की जिम्मेदारी जिला प्रशासन और स्थानीय पुलिस के पास होगी, जबकि पकड़े गए घुसपैठियों से संबंधित रोजाना की जानकारी गृह विभाग को भेजनी होगी। इस कार्रवाई को प्रदेश में अवैध घुसपैठ पर लगाम लगाने की बड़ी पहल माना जा रहा है।
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