देश के कई राज्यों में कॉमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई ठप, बंद होने की कगार पर रेस्टोरेंट्स और ढाबे, केंद्र सरकार ने 'आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955' किया लागू, आयात बंद होने से लिया फैसला

Curated By: shivup | Hindi Now Uttar Pradesh • 10 Mar 2026, 04:44 pm
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ईरान जंग और हॉर्मुज जलमार्ग प्रभावित होने से भारत में गैस सप्लाई पर असर पड़ा है। कई राज्यों में कॉमर्शियल गैस की कटौती से होटल-रेस्टोरेंट प्रभावित हो रहे हैं। सरकार ने जमाखोरी रोकने के लिए एसेंशियल कमोडिटी एक्ट लागू कर सप्लाई को प्राथमिकता के आधार पर बांट

ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच बढ़े सैन्य तनाव का असर अब भारत की ऊर्जा सप्लाई पर भी पड़ने लगा है। खाड़ी क्षेत्र में हालात बिगड़ने के कारण अहम समुद्री मार्ग Strait of Hormuz से गैस और तेल की आवाजाही बाधित हो गई है। इस वजह से देश में गैस सप्लाई पर दबाव बढ़ गया है और कई राज्यों में कॉमर्शियल गैस की उपलब्धता प्रभावित हो रही है। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में होटल, रेस्टोरेंट और छोटे कारोबारियों को गैस की कमी का सामना करना पड़ रहा है। कई जगहों पर कॉमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई सीमित कर दी गई है, जिससे होटल और ढाबा संचालकों के सामने कामकाज जारी रखना मुश्किल हो गया है। इसी बीच केंद्र सरकार ने जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए पूरे देश में एसेंशियल कमोडिटी Act 1955 लागू कर दिया है।


सप्लाई को प्राथमिकता के आधार पर बांटा गया

ऊर्जा संकट के बीच सरकार ने गैस वितरण को प्राथमिकता के आधार पर चार हिस्सों में विभाजित किया है। सबसे पहले घरेलू उपयोग और परिवहन क्षेत्र को प्राथमिकता दी गई है। घरों में इस्तेमाल होने वाली PNG और वाहनों के लिए CNG की सप्लाई पहले की तरह जारी रखने का फैसला किया गया है ताकि आम जनता पर ज्यादा असर न पड़े। इसके बाद खाद बनाने वाले उर्वरक उद्योगों को लगभग 70 प्रतिशत गैस उपलब्ध कराई जाएगी। हालांकि इन उद्योगों को यह सुनिश्चित करना होगा कि गैस का उपयोग केवल खाद उत्पादन के लिए ही किया जा रहा है। तीसरे स्तर पर नेशनल गैस ग्रिड से जुड़े बड़े उद्योगों को रखा गया है, जिन्हें उनकी जरूरत के करीब 80 प्रतिशत गैस दी जाएगी। चौथी श्रेणी में छोटे उद्योग, होटल, ढाबे और रेस्टोरेंट आते हैं, जिन्हें भी उनकी पुरानी खपत के आधार पर करीब 80 प्रतिशत गैस देने की व्यवस्था की गई है।


राज्यों में होटल कारोबार पर पड़ा असर

गैस की कमी का असर कई राज्यों में साफ दिखाई दे रहा है। उत्तर प्रदेश के लखनऊ, कानपुर और वाराणसी जैसे शहरों में घरेलू गैस की डिलीवरी में देरी हो रही है और कई उपभोक्ताओं को बुकिंग के चार से पांच दिन बाद भी सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है। महाराष्ट्र में मुंबई, पुणे और नागपुर जैसे शहरों में कॉमर्शियल गैस की भारी कटौती की गई है। मुंबई में करीब 20 प्रतिशत होटल और रेस्टोरेंट बंद होने की खबरें सामने आई हैं। होटल एसोसिएशन ‘AHAR’ ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द सप्लाई सामान्य नहीं हुई तो आधे से ज्यादा होटल बंद हो सकते हैं। मध्य प्रदेश, राजस्थान और कर्नाटक में भी होटल और छोटे कारोबारियों ने गैस की कमी को लेकर चिंता जताई है। कारोबारियों का कहना है कि गैस के बिना उनके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है, इसलिए कामकाज प्रभावित हो रहा है।


सरकार ने संकट से निपटने के लिए उठाए कदम

मौजूदा हालात को देखते हुए पेट्रोलियम मंत्रालय ने तेल कंपनियों के अधिकारियों की एक हाई-लेवल कमेटी बनाई है, जो गैस सप्लाई की लगातार समीक्षा कर रही है। इसके अलावा सभी रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के निर्देश भी दिए गए हैं ताकि घरेलू गैस की उपलब्धता बनी रहे। जमाखोरी रोकने के लिए गैस डिलीवरी के दौरान OTP और बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन अनिवार्य कर दिया गया है। वहीं घरेलू सिलेंडर बुकिंग के नियमों में बदलाव करते हुए तय किया गया है कि एक सिलेंडर की डिलीवरी के बाद अगली बुकिंग 25 दिन बाद ही की जा सकेगी। विशेषज्ञों के अनुसार मौजूदा संकट की बड़ी वजह Strait of Hormuz का प्रभावित होना और कतर के LNG प्लांट का उत्पादन रुकना है। भारत अपनी बड़ी मात्रा में LNG आयात के लिए कतर पर निर्भर है, इसलिए वहां उत्पादन रुकने का सीधा असर देश की गैस सप्लाई पर पड़ा है।


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