लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश, 50 से ज्यादा सांसदों का मिला समर्थन, कार्यवाही में पक्षपात का आरोप

Curated By: shivup | Hindi Now Uttar Pradesh • 10 Mar 2026, 02:28 pm
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लोकसभा में विपक्ष ने स्पीकर ओम बिरला को हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव पेश किया है। 50 से ज्यादा सांसदों के समर्थन के बाद प्रस्ताव स्वीकार कर लिया गया। इस पर सदन में करीब 10 घंटे चर्चा होगी और डिप्टी स्पीकर नियुक्ति का मुद्दा भी गरमा गया।

नई दिल्ली। लोकसभा में मंगलवार को विपक्ष ने स्पीकर ओम बिड़ला को पद से हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। इस प्रस्ताव को 50 से ज्यादा सांसदों का समर्थन मिला, जिसके बाद पीठासीन अधिकारी ने इसे सदन में पेश करने की अनुमति दे दी। अब इस प्रस्ताव पर लोकसभा में करीब 10 घंटे तक चर्चा होगी। विपक्ष ने आरोप लगाया है कि स्पीकर सदन की कार्यवाही के दौरान पक्षपात कर रहे हैं। इसी मुद्दे को लेकर विपक्षी दलों ने अविश्वास प्रस्ताव लाया है। प्रस्ताव पेश होने के साथ ही सदन में डिप्टी स्पीकर नियुक्त न किए जाने का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया गया, जिस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली।


डिप्टी स्पीकर को लेकर सदन में तीखी बहस

बहस के दौरान कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने सवाल उठाते हुए कहा कि जब स्पीकर मौजूद नहीं हैं तो डिप्टी स्पीकर की नियुक्ति क्यों नहीं की गई। उन्होंने यह भी पूछा कि ऐसे में पीठासीन अधिकारी के रूप में जगदंबिका पाल किस अधिकार से कार्यवाही चला रहे हैं। वहीं असदुद्दीन ओवैसी ने नियमों का हवाला देते हुए ‘पॉइंट ऑफ ऑर्डर’ उठाया और कहा कि जब स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर चर्चा हो रही हो तो स्पीकर कार्यवाही की अध्यक्षता नहीं कर सकते। उन्होंने मांग की कि पहले सदन की सहमति से यह तय किया जाए कि बहस की अध्यक्षता कौन करेगा। इस पर निशिकांत दुबे और किरेन रिजिजू ने कहा कि नियमों के अनुसार चेयर पर बैठा कोई भी सदस्य स्पीकर जैसी शक्तियों के साथ कार्यवाही चला सकता है। वहीं रविशंकर प्रसाद ने भी इस तर्क का समर्थन किया।


डिप्टी स्पीकर का पद लंबे समय से खाली

लोकसभा में डिप्टी स्पीकर नियुक्त न किए जाने का मुद्दा लंबे समय से चर्चा में रहा है। परंपरा के मुताबिक यह पद अक्सर विपक्ष को दिया जाता रहा है।

16वीं लोकसभा में एनडीए सरकार के दौरान अन्नाद्रमुक के सांसद थंबीदुरई को डिप्टी स्पीकर बनाया गया था। लेकिन 17वीं और 18वीं लोकसभा में अब तक इस पद पर किसी की नियुक्ति नहीं हुई है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार जानबूझकर इस पद को खाली रख रही है, क्योंकि यह पद विपक्ष को देना पड़ सकता है। हालांकि सत्ता पक्ष का कहना है कि इस मामले में दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन पाई है।

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