लखनऊ में दो अवैध मजारों पर प्रशासन की नजर, दी सख्त चेतावनी, कहा- खुद ही हटा लो नहीं तो..

Curated By: | Hindi Now Uttar Pradesh • 23 Jan 2026, 06:13 pm
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लखनऊ के केजीएमयू परिसर में दो अवैध मजारों को हटाने के लिए प्रशासन ने नोटिस जारी किया है। परिसर की कच्ची मजार को 7 दिन और बगल की पक्की मजार को 15 दिन में हटाने का अल्टीमेटम दिया गया है।

किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी केजीएमयू परिसर में स्थित अवैध मजारों को लेकर प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। शुक्रवार को विश्वविद्यालय प्रशासन ने दो मजारों को अवैध बताते हुए उन्हें हटाने के निर्देश जारी किए हैं। इस संबंध में मजारों पर नोटिस चस्पा कर दिया गया है। नोटिस में स्पष्ट कहा गया है कि ये मजारें विश्वविद्यालय की भूमि पर बिना किसी वैध अनुमति के बनाई गई हैं, जो नियमों के खिलाफ हैं।

प्रशासन की ओर से परिसर के अंदर स्थित कच्ची मजार को 7 दिन के भीतर स्वयं हटाने का निर्देश दिया गया है, जबकि केजीएमयू परिसर के बगल में स्थित पक्की मजार को हटाने के लिए 15 दिन का समय दिया गया है। तय समय सीमा के भीतर कार्रवाई न होने पर प्रशासन बलपूर्वक मजार हटाने की कार्रवाई करेगा।


परिसर और बगल की मजार को बताया गया अवैध

केजीएमयू प्रशासन के अनुसार विश्वविद्यालय परिसर के भीतर एक कच्ची मजार मौजूद है, जबकि दूसरी मजार परिसर से सटी भूमि पर बनी हुई है, जिसमें पक्का निर्माण किया गया है। दोनों ही मजारों को अवैध निर्माण मानते हुए नोटिस जारी किया गया है। प्रशासन का कहना है कि केजीएमयू एक प्रतिष्ठित शैक्षणिक और चिकित्सकीय संस्थान है, जहां नियमों और तय मानकों के अनुसार ही किसी भी प्रकार के निर्माण की अनुमति दी जाती है। बिना अनुमति बने ढांचे न केवल संस्थान की गरिमा के खिलाफ हैं, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था, यातायात और अस्पताल के सुचारु संचालन को भी प्रभावित करते हैं। इसी वजह से अवैध निर्माण के खिलाफ सख्त कदम उठाया जा रहा है।


सेवादार ने जताया विरोध, प्रशासन कार्रवाई पर अडिग
मजार की सेवादार कैसेर जहां ने प्रशासन के फैसले पर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि यह मजार नवाबों के जमाने से चली आ रही है और इसकी मरम्मत के लिए कई बार डॉक्टरों ने भी सहयोग किया है। उनके मुताबिक, यहां मरीज दुआ मांगने आते हैं और हर साल उर्स का आयोजन होता है, जिसमें हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय के लोग शामिल होते हैं। सेवादार ने साफ कहा कि वे खुद मजार नहीं तोड़ेंगे, अगर प्रशासन चाहे तो कार्रवाई करे। वहीं केजीएमयू प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि कानून से ऊपर कोई भी नहीं है और नियमों के तहत ही कार्रवाई की जाएगी।


पहले भी हटाए गए हैं अवैध कब्जे, पुलिस सतर्क
यह पहला मामला नहीं है जब केजीएमयू परिसर में अवैध निर्माण को लेकर सवाल खड़े हुए हों। इससे पहले भी परिसर में अतिक्रमण और अनधिकृत ढांचों को लेकर आंतरिक रिपोर्ट तैयार की गई थी, जिसके आधार पर कई बड़े अवैध कब्जे हटाए जा चुके हैं। केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ. के.के. सिंह ने बताया कि कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद ने डेढ़ साल पहले ही परिसर में मौजूद अवैध कब्जों और मजारों को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी। जो अवैध निर्माण अभी बचे हैं, उन्हें भी चरणबद्ध तरीके से हटाया जाएगा। मजार हटाने की संभावित कार्रवाई को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन और स्थानीय पुलिस को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन का कहना है कि पूरी प्रक्रिया कानून के दायरे में, शांतिपूर्ण और पारदर्शी तरीके से पूरी की जाएगी।


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