Curated By:
shivup |
Hindi Now Uttar Pradesh • 12 Feb 2026, 04:35 pm
किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) एक बार फिर छेड़खानी और यौन उत्पीड़न के आरोपों को लेकर सुर्खियों में है। पिछले 50 दिनों में यह तीसरा मामला सामने आया है, जिसने परिसर के माहौल और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस बार पीडियाट्रिक विभाग की एमडी छात्रा, जो रेजिडेंट डॉक्टर के रूप में कार्यरत है, ने विभाग के एडिशनल प्रोफेसर डॉ. संजीव कुमार वर्मा पर यौन उत्पीड़न और अभद्र व्यवहार का आरोप लगाया है। शिकायत मिलते ही विश्वविद्यालय प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए जांच प्रक्रिया शुरू कर दी और आरोपी के खिलाफ सख्त कदम उठाए।
शिकायत के 24 घंटे के भीतर कार्रवाई
पीड़ित रेजिडेंट डॉक्टर ने 11 फरवरी को परिवार के साथ विश्वविद्यालय प्रशासन को लिखित शिकायत दी थी। शिकायत मिलते ही प्रशासन ने सात सदस्यीय विशाखा कमेटी गठित कर मामले की जांच शुरू कर दी। कमेटी ने पीड़िता और आरोपी दोनों के बयान दर्ज किए और शुरुआती जांच में आरोपों को गंभीर पाया। इसके आधार पर 12 फरवरी को आरोपी एडिशनल प्रोफेसर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। KGMU प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने बताया कि निलंबन अवधि के दौरान आरोपी को डीन मेडिसिन कार्यालय से संबद्ध किया गया है और विभाग में उनके प्रवेश पर भी रोक लगा दी गई है। प्रशासन ने साफ कहा है कि दोषी पाए जाने पर और भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
मोबाइल संदेश और अभद्रता के आरोप बने आधार
रेजिडेंट डॉक्टर ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि प्रोफेसर द्वारा अनुचित व्यवहार किया गया और मोबाइल पर आपत्तिजनक संदेश भी भेजे गए। इन आरोपों की पुष्टि के लिए विशाखा कमेटी ने तकनीकी और परिस्थितिजन्य तथ्यों की भी जांच की। कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद के निर्देश पर पूरी प्रक्रिया को निष्पक्ष रखने पर विशेष जोर दिया गया। शुरुआती रिपोर्ट में आरोपों को सही पाए जाने के बाद प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई कर यह संदेश देने की कोशिश की है कि कार्यस्थल पर किसी भी तरह की असुरक्षा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मामले की विस्तृत जांच अभी जारी है और अंतिम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
पहले भी सामने आ चुके हैं दो बड़े मामले
इस घटना से पहले भी KGMU में दो गंभीर मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें पुलिस कार्रवाई तक की नौबत आई थी। दिसंबर 2025 में एक छात्रा ने शादी का झांसा देकर शोषण करने का आरोप लगाया था, जबकि एक अन्य मामले में इंटर्न डॉक्टर पर नर्सिंग छात्रा ने गंभीर आरोप लगाए थे। इन घटनाओं के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन पर कैंपस में सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करने का दबाव बढ़ा है। ताजा मामले ने फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि मेडिकल संस्थानों में कार्यरत छात्राओं और कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर और मजबूत व्यवस्थाओं की जरूरत है।
यह भी पढ़ें- लखनऊ में बैंक के बाहर हंगामा, ग्राहकों ने ब्रांच में डाला ताला, करोड़ो के घोटाले का आरोप लगाया