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shivup |
Hindi Now Uttar Pradesh • 12 Feb 2026, 06:11 pm
राजधानी लखनऊ स्थित शक्ति भवन परिसर में गुरुवार को बिजली विभाग के कर्मचारियों ने इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल और निजीकरण के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में जुटे कर्मचारियों ने सरकार और विभागीय नीतियों के खिलाफ नारेबाजी की और अपनी मांगों को जल्द पूरा करने की चेतावनी दी। प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने कहा कि अगर सरकार ने समय रहते निर्णय वापस नहीं लिया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। प्रदर्शन में शामिल कर्मचारियों का कहना था कि बिजली क्षेत्र का निजीकरण आम उपभोक्ताओं और कर्मचारियों दोनों के लिए नुकसानदायक साबित होगा। प्रदर्शन कई घंटों तक चला और मौके पर प्रशासनिक अधिकारी स्थिति पर नजर बनाए रहे।
निजीकरण के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने कहा कि बिजली के निजीकरण का मुद्दा अब राष्ट्रीय स्तर पर उठ चुका है और देशभर के लाखों बिजली कर्मचारी इसके विरोध में एकजुट हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को तीन प्रमुख मांगों पर तुरंत फैसला लेना चाहिए, जिनमें उत्तर प्रदेश में निजीकरण का फैसला वापस लेना, इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल को रद्द करना और पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल करना शामिल है। इसके अलावा आउटसोर्सिंग पर काम कर रहे कर्मचारियों को स्थायी नियुक्ति देने की भी मांग उठाई गई। कर्मचारियों ने कहा कि मांगें न मानी गईं तो देशव्यापी हड़ताल जैसे बड़े कदम उठाए जाएंगे।
लेबर कोड और ठेका प्रथा को लेकर भी जताई नाराजगी
प्रदर्शन में शामिल विभिन्न कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों ने कहा कि नए लेबर कोड लागू होने से स्थायी नौकरियों की जगह ठेका और अस्थायी रोजगार को बढ़ावा मिल रहा है। भारतीय क्रांतिकारी मजदूर पार्टी से जुड़े प्रतिनिधियों ने कहा कि पहले मौजूद श्रम कानूनों को समेटकर चार नए कानून लागू किए गए हैं, जिससे कर्मचारियों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। वक्ताओं ने कहा कि अगर कर्मचारी एकजुट नहीं हुए तो भविष्य में रोजगार और सुरक्षा दोनों पर खतरा बढ़ सकता है। प्रदर्शनकारियों ने साफ कहा कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा और आने वाले दिनों में इसे और तेज किया जाएगा।
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