ईरान में फंसा शिया धर्मगुरु का परिवार, खाड़ी देशों में लखनऊ के सवा लाख लोग, फोन पर सुनाई देती हैं धमाकों की आवाज

Curated By: shivup | Hindi Now Uttar Pradesh • 05 Mar 2026, 12:11 pm
news-banner

ईरान-इजराइल संघर्ष के बीच लखनऊ के सवा लाख से ज्यादा लोग खाड़ी देशों में फंसे हैं। शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जवाद का बेटा और परिवार के सदस्य भी ईरान में हैं। बम धमाकों की आवाज सुनकर लखनऊ में परिजनों की चिंता बढ़ गई है।

मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के बीच लखनऊ के हजारों परिवार चिंता में हैं। शहर के शिया समुदाय के प्रमुख धर्मगुरु मौलाना कल्बे जवाद का बेटा, बहन और परिवार के अन्य सदस्य ईरान में फंसे हुए हैं। इसके अलावा लखनऊ के सवा लाख से ज्यादा लोग ईरान, ओमान, बहरीन, मस्कट, रियाद, दुबई, रसअलखेमा और शारजाह जैसे खाड़ी देशों में मौजूद हैं। जंग और फ्लाइट्स रद्द होने के कारण इनकी वतन वापसी फिलहाल मुश्किल हो गई है। परिजन लगातार फोन के जरिए उनसे संपर्क में हैं, लेकिन कई बार बातचीत के दौरान बैकग्राउंड में बम धमाकों की आवाज सुनाई देती है, जिससे घर वालों की चिंता और बढ़ गई है। ट्रैवल एजेंसी संचालकों के मुताबिक लखनऊ से हर हफ्ते करीब 115 उड़ानें खाड़ी देशों के लिए जाती हैं, लेकिन मौजूदा हालात में कई उड़ानें रद्द होने से वहां फंसे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।


ईरान में रह रहा मौलाना कल्बे जवाद का बेटा

मौलाना कल्बे जवाद ने बताया कि उनका छोटा बेटा कल्बे अहमद लंबे समय से ईरान में रहकर पढ़ाई कर रहा है। वह कुम शहर में रहता है, जहां हाल ही में मिसाइल हमले हुए हैं। उन्होंने बताया कि उनका बेटा करीब छह साल से ईरान में है, जबकि भांजे को वहां रहते हुए करीब 16 साल हो चुके हैं। परिवार के कई सदस्य भी वहीं रहते हैं। मौलाना ने कहा कि फिलहाल सभी लोग सुरक्षित हैं, लेकिन लगातार हो रहे हमलों से चिंता बनी हुई है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र से अमेरिका और इजराइल के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। मौलाना ने कहा कि स्कूलों और रिहायशी इलाकों पर हमले से कई निर्दोष लोगों की जान गई है और ऐसे मामलों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सख्त कदम उठाए जाने चाहिए।


तेहरान में रिपोर्टिंग कर रहा लखनऊ का पत्रकार

लखनऊ के रविश जैदी इस समय तेहरान में ईरानी सरकारी टीवी चैनल में रिपोर्टर के तौर पर काम कर रहे हैं। उनके पिता अमीर अब्बास जैदी ने बताया कि उनका बेटा करीब 17 साल से ईरान में रह रहा है। हाल ही में उसे हार्ट अटैक आया था और उसकी ओपन हार्ट सर्जरी हुई थी। अस्पताल से डिस्चार्ज होने के तीन दिन बाद ही वहां युद्ध जैसी स्थिति बन गई। उन्होंने बताया कि बेटे ने हमले की तस्वीरें भेजी हैं और जहां वह रह रहा है, वहां से करीब 100 मीटर की दूरी पर बम गिराए गए हैं। पिता ने बताया कि पिछले साल भी इजरायली हमले के दौरान उनका बेटा बाल-बाल बचा था। उस समय वह जिस जगह रिपोर्टिंग कर रहा था, वहां से महज 15 सेकेंड पहले हट गया था और उसी जगह पर बम गिर गया था।


परिवार की चिंता बढ़ी, वापसी का इंतजार

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण लखनऊ के कई परिवारों की चिंता बढ़ गई है। अमीर अब्बास जैदी ने बताया कि उन्होंने कई बार बेटे को लखनऊ लौटने के लिए कहा, लेकिन वह ईरान छोड़ने को तैयार नहीं है। उन्होंने बताया कि पिछले साल जब इजराइल ने ईरान पर हमला किया था, उसी दिन लखनऊ में उनकी पत्नी का निधन हो गया था और बेटा अपनी मां के जनाजे में भी शामिल नहीं हो सका था। अब फिर से युद्ध जैसी स्थिति बनने के कारण परिवार की चिंता और बढ़ गई है। लखनऊ के कई अन्य परिवार भी अपने रिश्तेदारों की सुरक्षित वापसी का इंतजार कर रहे हैं।


यह भी पढ़ें- ईरान-इजराइल जंग का आज छठा दिन, इजराइल ने लेबनान में फिलीस्तीनी रिफ्यूजी कैंप पर किया हमला, अब डिमोना न्यूक्लियर सेंटर को निशाना बना सकता है ईरान

advertisement image