'हमारा कहीं ठिकाना नहीं, उन लोगों ने हमें मारा, क्या मार ही डालेंगे तब प्रशासन कुछ करेगा?' और फिर झकझोर देने वाली घटना

Curated By: editor1 | Hindi Now Uttar Pradesh • 23 Aug 2025, 12:34 pm
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वाराणसी के राजातालाब तहसील में खुद को आग लगाने वाले बुुजुर्ग की अस्पताल में मौत हो गई है। मौत से पहले उन्होंने अपना दर्द बयां किया है। आइये जानते हैं कि उन्होंने क्या कहा?

'हमारा कहीं ठिकाना नहीं है। हमे न्याय नहीं मिल रहा तो हम क्या करें? हमको उन लोगों ने मारा-पीटा है। क्या जब जान से मार डालेंगे, तब ही कुछ प्रशासन करेगा।' यह शब्द वाराणसी की राजातालाब तहसील में खुद को आग के हवाले करने वाले बुजुर्ग वशिष्ठ नारायण गौड़ के हैं। आग लगाने के बाद बुरी तरह झुलसे बुजुर्ग ने कंपकंपाते होठों से रुंधे हुए स्वर में तहसील परिसर में यह बात कही। उसकी जुबान से निकले शब्द सुनकर हर कोई हिल गया। घटना के बाद उसे आनन-फानन अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन उसकी जान नहीं बच सकी। शुक्रवार देर रात इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।


बताया जा रहा है कि घटना के बाद बुजुर्ग को जनपद के बीएचयू ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया था। मौत के बाद उसके परिजनों को सूचना दी गई है। वहीं बुजुर्ग के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए शिवपुर भेजा गया है। शुक्रवार दोपहर बुजुर्ग पेट्रोल से भरा कमंडल लेकर राजातालाब तहसील पहुंचा था। अचानक उसने खुद पर पेट्रोल छिड़क लिया। वहां मौजूद वकीलों और पुलिसकर्मियों ने उसे रोकने की कोशिश की, लेकिन तब तक उसने माचिस जलाकर खुद को आग लगा ली। आग लगाने के बाद चीखते हुए वह इधर-उधर भागने लगा। मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। इस दौरान पुलिसकर्मियों ने मिट्टी और कपड़े डालकर किसी तरह आग बुझाई। हालांकि कुछ ही मिनटों में वह 50 फीसदी से अधिक जल चुका था, जिसके बाद अस्पताल में उसकी मौत हो गई।


क्या है पूरा मामला, क्यों लगाई आग?

मिर्जामुराद के जोगापुर निवासी वशिष्ठ नारायण गौड़ तीन बेटों के पिता थे। उनके तीनों बेटे नौकरी करते हैं। वशिष्ठ नारायण ने गांव की दो बीघा जमीन पर कब्जा कर रखा था और उसे खेती के साथ अन्य कार्यों में इस्तेमाल कर रहे थे। हालांकि सरकारी अभिलेखों में वह भूमि ग्राम समाज की सार्वजनिक संपत्ति के नाम से दर्ज थी। इस मामले में राजातालाब तहसील की तहसीलदार कोर्ट में केस चला, जहां सरकारी वकील ने भूमि के दस्तावेज और नक्शा पेश किया, लेकिन वशिष्ठ कोई ठोस साक्ष्य नहीं दे पाए। लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद 17 मई 2025 को कोर्ट ने उन्हें जमीन से बेदखली का आदेश दे दिया।


हाथ से जमीन जाने पर आहत वशिष्ठ ने दी जान

कोर्ट के फैसले के बाद पुलिस-प्रशासन ने चेतावनी दी कि कब्जा खत्म करना होगा। वशिष्ठ ने डीएम कोर्ट में अपील की, लेकिन तीन दिन पहले यह भी निरस्त कर दी गई। न्याय न मिलने और हताशा में वशिष्ठ शुक्रवार को तहसील परिसर पहुंचे। मंदिर के पास उन्होंने कमंडल में लाए पेट्रोल से खुद को आग के हवाले कर लिया। आग लगाने के बाद झुलसे बुजुर्ग वशिष्ठ ने कराहते हुए कहा कि उन्हें न्याय नहीं मिला, अधिकारी जांच नहीं करते, केवल पैसे मांगते हैं और उन्हें हाईकोर्ट जाने को कह रहे हैं, लेकिन उनके पास साधन नहीं हैं।


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