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Shiv Vishwakarma |
Hindi Now Uttar Pradesh • 09 Nov 2025, 05:44 pm
बाराबंकी के कोठी कस्बे में सक्रिय एक ठग गिरोह का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है, जो बेहद चालाकी से बुजुर्गों के मोबाइल फोन से सिम निकालकर उनके नाम पर यूपीआई आईडी बनाता था और फिर रकम निकाल लेता था। गिरोह के सदस्य बुरका पहनकर लखनऊ में एटीएम से रुपये निकालते थे, ताकि पहचान न हो सके। उनका ठगी का तरीका इतना पेशेवर था कि कोई आसानी से शक नहीं कर पाता था।
एसपी अर्पित विजयवर्गीय ने रविवार को पुलिस लाइन सभागार में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि अजोवा गांव के बुजुर्ग जगदीश शरण के बैंक खाते से 1.19 लाख रुपये गायब होने की शिकायत के बाद जांच शुरू की गई थी। साइबर सेल और कोठी पुलिस की संयुक्त टीम ने छानबीन के बाद गिरोह के चार सदस्यों इनायतपुर निवासी रंजीत कुमार, कुतुबापुर निवासी सलीम, अजोवा निवासी नौमीलाल और नौबस्ता गांव के सिम विक्रेता हेमंत श्रीवास्तव को गिरफ्तार किया है।
मुख्य आरोपी रंजीत कोठी में पंजाब नेशनल बैंक के पास जनसेवा केंद्र चलाता था। वहां सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के बहाने बुजुर्गों को बुलाया जाता था। जैसे ही वे मोबाइल से ओटीपी या बैंक से संबंधित काम करवाते, रंजीत उनके फोन से सिम निकालकर उसे अपने गिरोह को दे देता। इसके बाद उसी सिम से बुजुर्गों के नाम पर यूपीआई आईडी बनाई जाती और खातों से रकम निकाल ली जाती। पूछताछ में पता चला कि आरोपी नौमीलाल लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का लालच देकर जनसेवा केंद्र बुलाता था, जबकि हेमंत श्रीवास्तव फर्जी नामों से सिम कार्ड उपलब्ध कराता था। इन फर्जी सिमों की मदद से गिरोह साइबर ठगी को अंजाम देता था।
पुलिस ने छापेमारी में आरोपियों के पास से 38 मोबाइल फोन, लैपटॉप, प्रिंटर, लाखों रुपये की मोबाइल एक्सेसरीज और 30 हजार रुपये नकद बरामद किए हैं। पुलिस के अनुसार बरामद सभी सामान ठगी से अर्जित धन से खरीदे गए थे। फिलहाल आरोपियों से पूछताछ जारी है और पुलिस यह भी पता लगा रही है कि क्या इस गिरोह के तार अन्य जिलों में भी फैले हुए हैं।
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