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shivup |
Hindi Now Uttar Pradesh • 25 Apr 2026, 11:09 am
पुलिस विभाग ने सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए अब सख्त कदम उठाया है। वर्दी पहनकर वीडियो और रील बनाने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। हाल ही में कुछ मामलों के सामने आने के बाद यह फैसला लिया गया है, जिसमें एक महिला सिपाही को वर्दी में वीडियो पोस्ट करने के कारण नौकरी छोड़नी पड़ी थी, वहीं एक थाने का सीसीटीवी फुटेज भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था, जिसमें एक दरोगा पर रिश्वत लेने के आरोप लगे थे। इन घटनाओं ने विभाग की छवि पर सवाल खड़े किए थे, जिसके बाद अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि अब सोशल मीडिया को लेकर कोई भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
वर्दी में वीडियो और हथियारों के साथ फोटो पर पूरी रोक
नई पॉलिसी के तहत ड्यूटी के दौरान या थाने, पुलिस लाइन और कार्यालय जैसे कार्यस्थलों पर वर्दी में वीडियो या रील बनाना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। इतना ही नहीं, ड्यूटी खत्म होने के बाद भी वर्दी पहनकर किसी तरह का कंटेंट पोस्ट नहीं किया जा सकेगा। हथियारों के साथ फोटो खिंचवाना, फायरिंग के वीडियो बनाना या पुलिस ड्रिल का लाइव प्रसारण करना भी अनुशासनहीनता माना जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की गतिविधियां विभाग की गरिमा को प्रभावित करती हैं और सुरक्षा से जुड़ी संवेदनशील जानकारी भी बाहर जा सकती है।
मीडिया और सोशल मीडिया पर भी सख्त निगरानी
नई व्यवस्था के अनुसार सहायक पुलिस आयुक्त स्तर से नीचे के अधिकारी अब सीधे मीडिया में बयान या प्रतिक्रिया नहीं दे सकेंगे। सभी प्रेस नोट संबंधित जोन के मीडिया सेल की मंजूरी के बाद ही जारी होंगे। इसके अलावा, वीआईपी मूवमेंट के दौरान किसी भी तरह की पोस्ट डालने पर भी रोक रहेगी। पुलिसकर्मियों को विभागीय जानकारी से जुड़े वीडियो या ऑडियो साझा करने की अनुमति नहीं होगी। साथ ही, सोशल मीडिया के जरिए कमाई करने पर भी पाबंदी लगाई गई है, जब तक कि इसके लिए शासन से अनुमति न ली जाए। सोशल मीडिया पर किसी को ट्रोल करना या अपमानजनक टिप्पणी करना भी नियमों के खिलाफ माना जाएगा।
उल्लंघन करने पर होगी सख्त कार्रवाई
डीसीपी सिटी सैयद अली अब्बास ने बताया कि यह नई सोशल मीडिया पॉलिसी सभी पुलिसकर्मियों पर लागू होगी और इसका सख्ती से पालन कराया जाएगा। यदि कोई नियमों का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि इस पहल का मकसद पुलिसकर्मियों को उनके मूल कर्तव्यों के प्रति अधिक जिम्मेदार बनाना और विभाग की छवि को बनाए रखना है।
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