आजादी के 78 सालों बाद पहली बार पहुंची रेल लाइन, लोगों के चेहरे पर खिली मुस्कान

Curated By: editor1 | Hindi Now Uttar Pradesh • 29 Aug 2025, 01:14 pm
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देश में आज भी एक ऐसा प्रदेश है, जहां आज तक ट्रेन नहीं जाती थी। इसकी वजह यह है कि यहां अभी तक रेल लाइन नहीं बिछ पाई थी। अब यहां रेल लाइन बिछने से पहले बार रेल सेवा शुरू होगी और इससे लोगों की उम्मीदें जागी हैं।

देश की आजादी के 78 साल बाद आखिरकार मिजोरम भी रेलवे के नक्शे पर शामिल हो गया है। लंबे इंतजार के बाद अब राजधानी आइजोल को रेल नेटवर्क से जोड़ने वाली बैराबी–सैरांग रेलवे लाइन पूरी तरह तैयार हो गई है। यह लाइन यहां के लोगों के लिए एक नई उम्मीद लेकर आई है। जहां पहले लोगों को सफर और व्यापार में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था, वहीं अब यह रेलमार्ग उनके जीवन की लाइफलाइन बन जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 सितंबर को इस ऐतिहासिक परियोजना का उद्घाटन करेंगे और यहां से पहली ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे।


बैराबी–सैरांग रेलवे प्रोजेक्ट की नींव 1999 में रखी गई थी। दुर्गम पहाड़ों, घने जंगलों और मूसलाधार बारिश के कारण सर्वेक्षण से लेकर निर्माण तक यह यात्रा बेहद चुनौतीपूर्ण रही। कई बार सर्वे रिपोर्ट बदलनी पड़ी। 2008-09 में इस परियोजना को राष्ट्रीय महत्व का दर्जा दिया गया और 2014 में प्रधानमंत्री मोदी ने इसका शिलान्यास किया। लगातार 11 वर्षों की कोशिशों और कठिनाइयों से जूझने के बाद आज यह सपना साकार हुआ है। करीब 51 किलोमीटर लंबी इस रेलवे लाइन पर चार स्टेशन बनाए गए हैं। इनमें हार्तुकी, कौनपुई, मुलखांग और सैरांग स्टेशन शामिल हैं।


रेल मार्ग पर बनीं 48 सुरंगे, कुतुब मीनार से भी ऊंचा ब्रिज

इस मार्ग पर कुल 48 सुरंगें बनाई गई हैं, जिनकी लंबाई लगभग 13 किलोमीटर है। साथ ही 55 बड़े और 87 छोटे पुलों का निर्माण हुआ है। इनमें से एक ब्रिज खासतौर पर चर्चा में है जिसकी ऊंचाई 104 मीटर है, जो दिल्ली की कुतुब मीनार (72.5 मीटर) से भी अधिक है। ट्रैक की गति 110 किलोमीटर प्रति घंटा होगी। इससे बैराबी से आइजोल तक की यात्रा, जो पहले 5 से 6 घंटे लेती थी, अब महज डेढ़ घंटे में पूरी हो सकेगी।


8071 करोड़ रुपये की लागत से बनी रेल लाइन

इस परियोजना की लागत लगभग 8071 करोड़ रुपये आई है। इसके पूरा होने से न केवल मिजोरम बल्कि पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र की तस्वीर बदलने की उम्मीद है। इस मार्ग से कोलकाता, अगरतला और दिल्ली के लिए सीधी ट्रेनें चल सकेंगी। इससे राज्य का संपर्क अन्य हिस्सों से मजबूत होगा और व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि मिजोरम की भौगोलिक परिस्थितियां इस परियोजना की सबसे बड़ी चुनौती थीं। साल में केवल चार से पांच महीने ही निर्माण संभव हो पाता था। भारी मशीनों को छोटे हिस्सों में तोड़कर साइट पर जोड़ा गया और निर्माण सामग्री असम व पश्चिम बंगाल से मंगाई गई। इसके बावजूद इंजीनियरों ने इस कठिन काम को अंजाम देकर एक अद्भुत मिसाल पेश की है।


रेल नेटवर्क से सीधे जुड़े चार राज्य

इस परियोजना से पूर्वोत्तर के आठ में से चार राज्य त्रिपुरा, असम, अरुणाचल प्रदेश और अब मिजोरम सीधे रेलवे नेटवर्क से जुड़ गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम नॉर्थ ईस्ट के सामाजिक और आर्थिक विकास का गेम चेंजर साबित होगा और इस क्षेत्र को देश की मुख्यधारा से और अधिक मजबूती से जोड़ेगा।


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