यूपी में मौजूद है एक और काशी, जहां मीरा ने बनाया था मंदिर, जानें कहां है छोटा काशी?

Curated By: Shiv Vishwakarma | Hindi Now Uttar Pradesh • 11 Jul 2025, 02:05 pm
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उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में छोटा काशी मौजूद है। इतिहास के पन्नों में इसका नाम दर्ज है और इसका आध्यात्मिक महत्व है। आइये इस छोटी काशी के बारे में जानते हैं।

उत्तर प्रदेश में वाराणसी (काशी) के अलावा एक और काशी मौजूद है। यह फतेहपुर जिले के गंगा तट पर स्थित शिवराजपुर गांव में स्थित है। इसे छोटी काशी के रूप में जाना जाता है। यह न केवल आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसका ऐतिहासिक महत्व भी दर्ज है। इसे उत्तर प्रदेश गजेटियर में धर्म नगरी के रूप में विशेष स्थान प्राप्त है। इतिहासकारों और स्थानीय कथाओं के मुताबिक शिवराजपुर का इतिहास करीब 5000 साल पुराना है। यह स्थान ऋषि भृगु, दुर्वाषा जैसे तपस्वियों का केन्द्र रहा है। यह विद्वता और धार्मिक तपस्या का प्रमुख स्थल माना जाता रहा है। गंगा-यमुना के बीच बसे इस गांव की मिट्टी पर कई प्राचीन शिव मंदिरों की नक्काशी आज भी प्राचीन शैव संस्कृति की याद दिलाती है।


15वीं शताब्दी में कृष्ण भक्त मीरा बाई के इस स्थल से जुड़ने के कई तथ्य मौजूद हैं। वह यहां गिरधर गोपाल की मूर्ति स्थापित करने के बाद बनारस चली गई थीं। जब उन्होंने मूर्ति को अपने साथ ले जाने का प्रयास किया तो वह नहीं हिली। इसे ईश्वर की इच्छा के विपरीत माना गया और वहीं मंदिर बना दिया गया। इसे आज भी 'मीरा का मंदिर' कहा जाता है। यहां स्थापित अष्टभुजीय गिरधर गोपाल की प्रतिमा दुर्लभ मानी जाती है और कहा जाता है कि यह दुनिया में ऐसी अनुपम प्रतिमा है, जो और कहीं नहीं है।


शिवराजपुर गांव में कार्तिक पूर्णिमा के समय आठ दिवसीय भव्य और विशाल मेला लगता है। इसे यूपी गजेटियर में बड़े मेलों की सूची में शामिल किया गया है। इस मेला के दौरान दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं, जहां गंगा स्नान, झूले, ऊंट‑खच्चर की बिक्री और किसानों के सामान की दुकानें लगती हैं, जिससे यह धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सव बन जाता है। हालांकि समय के साथ इस मेला का स्वरूप बदल रहा है। हालांकि श्रद्धालुओं की भागीदारी अभी भी पूरी तरह बनी हुई है।


स्थानीय लोग बताते हैं कि शिवराजपुर क्षेत्र में कई प्राचीन मंदिर जैसे सिद्धेश्वर, कपिलेश्वर, पंचवटेश्वर, मुंडेश्वर और रसिक बिहारी मंदिर हैं। यह आज उपेक्षा के शिकार हैं और जीर्ण-शीर्ण स्थिति में हैं। भौगोलिक दृष्टि से शिवराजपुर फतेहपुर जिले की बिंदकी तहसील में स्थित है। यह जिला मुख्यालय से लगभग 38 किलोमीटर दूर है और मालवां ब्लॉक के करीब स्थित है। यहां की जनसंख्या हजारों में नहीं, बल्कि कुछ ही सौ में है, लेकिन आस्था और धर्म की दृष्टि से इसका महत्व अत्यधिक है।


इस पौराणिक स्थल पर समय-समय पर आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानंद सरस्वती ने भी साधना की थी और स्थानीय धार्मिक-कवियित्री मीरा बाई का योगदान आज भी इस भूमि की संस्कृति में स्पष्ट दिखाई देता है। इस तरह फतेहपुर जिले का शिवराजपुर न सिर्फ एक गांव है, बल्कि एक जीवंत आध्यात्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत है। यह स्थल आज भी गंगा स्नान, मंदिर दर्शन और भक्ति के लिए श्रद्धालुओं का आकर्षण बना हुआ है। इसे छोटा काशी के रूप में जाना जाता है।


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