CM तो बन गए, लेकिन टूट सकता है सपना, थलापति की सीट पर कांटों का ताज! 107 सीटें जीतकर भी फंसी सरकार?

Curated By: shivup | Hindi Now Uttar Pradesh • 10 May 2026, 12:50 pm
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तमिलनाडु में थलपति विजय मुख्यमंत्री बन गए हैं, लेकिन बहुमत के लिए सहयोगी दलों पर निर्भर सरकार के सामने स्थिरता बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती बनता दिखाई दे रहा है। विपक्ष भी सरकार की हर गतिविधि पर नजर बनाए हुए है।

तमिलनाडु की राजनीति में इस बार बड़ा उलटफेर देखने को मिला। अभिनेता से नेता बने थलपति विजय ने अपनी पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम के साथ चुनाव में शानदार प्रदर्शन किया और 107 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बन गए। इसके बाद विजय ने मुख्यमंत्री पद की शपथ भी ले ली, लेकिन सरकार बनने के साथ ही राजनीतिक चुनौतियां भी सामने आने लगी हैं। बहुमत के लिए जरूरी 118 सीटों का आंकड़ा विजय अपनी पार्टी के दम पर नहीं जुटा पाए। बाद में कांग्रेस, वीसीके और अन्य सहयोगी दलों के समर्थन से सरकार बनाने का रास्ता साफ हुआ। अब राजनीतिक जानकारों का कहना है कि विजय के सामने सबसे बड़ी चुनौती सरकार को पूरे पांच साल तक स्थिर बनाए रखने की होगी। क्योंकि गठबंधन की राजनीति में छोटी नाराजगी भी सरकार पर बड़ा संकट ला सकती है।


गठबंधन की मजबूरी बनी सबसे बड़ी चुनौती

तमिलगा वेत्री कड़गम के पास अपने 107 विधायक हैं, जबकि बाकी समर्थन सहयोगी दलों के जरिए जुटाया गया है। यही वजह है कि अब हर राजनीतिक फैसले पर सहयोगी दलों की नजर रहेगी। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कोई छोटा दल भी समर्थन वापस लेता है या कुछ विधायक नाराज होते हैं, तो सरकार अल्पमत में आ सकती है। विपक्षी दल डीएमके और एआईएडीएमके भी सरकार की हर गतिविधि पर नजर बनाए हुए हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि आने वाले दिनों में विजय को हर कदम बेहद सोच-समझकर उठाना होगा। सोशल मीडिया पर भी लगातार यह कहा जा रहा है कि मुख्यमंत्री की कुर्सी मिलने के बाद असली परीक्षा अब शुरू हुई है। क्योंकि चुनाव जीतना आसान हो सकता है, लेकिन गठबंधन सरकार को लंबे समय तक संभालना सबसे मुश्किल काम माना जाता है।


कांग्रेस से दूरी, अब उसी के सहारे सरकार

विजय की राजनीतिक यात्रा भी इस समय चर्चा का विषय बनी हुई है। बताया जा रहा है कि कई साल पहले विजय ने कांग्रेस नेतृत्व से मुलाकात कर राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने की इच्छा जताई थी। हालांकि उस समय बात आगे नहीं बढ़ सकी। अब हालात ऐसे बने कि कांग्रेस के समर्थन से ही विजय सरकार बनाने में सफल हुए। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि फिल्मों की लोकप्रियता और स्टारडम जनता को आकर्षित जरूर कर सकता है, लेकिन सरकार चलाने के लिए राजनीतिक संतुलन और संगठन क्षमता की जरूरत होती है। विजय को अब सहयोगी दलों के साथ तालमेल बनाकर चलना होगा। वहीं समर्थकों का दावा है कि जनता ने बदलाव के लिए वोट दिया है और विजय तमिलनाडु की राजनीति में नया अध्याय लिखेंगे। फिलहाल पूरे राज्य की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या विजय अपनी सरकार को स्थिर रख पाएंगे या फिर गठबंधन की मजबूरी उनके लिए मुश्किल खड़ी करेगी।


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