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shivnowup |
Hindi Now Uttar Pradesh • 07 Jan 2026, 06:28 pm
उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य कर्मचारियों के लिए बड़ा और सख्त फैसला लिया है। अब प्रदेश के सभी राज्य कर्मियों को अपनी चल-अचल संपत्तियों का पूरा ब्योरा मानव संपदा पोर्टल पर ऑनलाइन देना अनिवार्य होगा। यह नियम प्रदेश के आठ लाख से अधिक सरकारी कर्मचारियों पर लागू होगा। सरकार ने साफ कर दिया है कि अगर तय समय सीमा तक संपत्ति का विवरण अपलोड नहीं किया गया तो फरवरी माह में जनवरी का वेतन रोक दिया जाएगा। इसके साथ ही ऐसे कर्मचारियों के प्रमोशन पर भी रोक लगाई जाएगी। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ेगी और सरकारी सिस्टम में जवाबदेही तय होगी। एक जनवरी से मानव संपदा पोर्टल पर संपत्ति विवरण भरने की सुविधा शुरू कर दी गई है। सभी विभागाध्यक्षों को अपने-अपने विभागों में इसका कड़ाई से पालन कराने के निर्देश दिए गए हैं।
31 जनवरी तक देना होगा संपत्ति का पूरा विवरण
मुख्य सचिव की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को 31 दिसंबर 2025 तक अर्जित की गई अपनी चल और अचल संपत्तियों का विवरण 31 जनवरी 2026 तक मानव संपदा पोर्टल पर ऑनलाइन भरना अनिवार्य होगा। इसमें जमीन, मकान, फ्लैट, वाहन, बैंक जमा, बीमा, शेयर, आभूषण और अन्य मूल्यवान संपत्तियां शामिल होंगी। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि तय तिथि तक विवरण न देने को गंभीर लापरवाही माना जाएगा। ऐसे मामलों को प्रतिकूल प्रविष्टि के रूप में देखा जाएगा। विभागाध्यक्षों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने अधीनस्थ अधिकारियों-कर्मचारियों को समय रहते इस संबंध में सूचित करें और सुनिश्चित करें कि सभी का विवरण पोर्टल पर दर्ज हो जाए।
वेतन और प्रमोशन दोनों पर पड़ेगा असर
सरकार ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि जो अधिकारी या कर्मचारी 31 जनवरी 2026 तक अपनी संपत्ति का विवरण मानव संपदा पोर्टल पर अपलोड नहीं करेंगे, उन्हें फरवरी माह में जनवरी का वेतन नहीं दिया जाएगा। इतना ही नहीं, एक फरवरी 2026 के बाद होने वाली विभागीय पदोन्नति समितियों (डीपीसी) की बैठकों में ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रमोशन पर भी विचार नहीं किया जाएगा। सरकार का कहना है कि यह कदम भ्रष्टाचार पर नियंत्रण और सिस्टम में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से उठाया गया है। पहले भी संपत्ति विवरण देने का प्रावधान था, लेकिन अब इसे पूरी तरह ऑनलाइन और अनिवार्य बना दिया गया है, जिससे किसी तरह की ढिलाई न बरती जा सके।
सरकार का फोकस पारदर्शिता और जवाबदेही पर
प्रदेश सरकार का मानना है कि संपत्ति विवरण ऑनलाइन होने से किसी भी अधिकारी या कर्मचारी की संपत्ति की निगरानी आसान होगी। इससे आय से अधिक संपत्ति के मामलों पर भी प्रभावी कार्रवाई संभव हो सकेगी। सरकार ने सभी विभागों से अपेक्षा की है कि वे इस निर्देश को गंभीरता से लें और समयसीमा के भीतर अनुपालन सुनिश्चित कराएं।
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