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shivup |
Hindi Now Uttar Pradesh • 09 Mar 2026, 11:57 am
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर आवास विभाग ने नया सिस्टम लागू करने का फैसला किया है, जिससे विकास प्राधिकरणों की योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी और लोगों को समय पर कब्जा मिल सकेगा। लंबे समय से लोग शिकायत कर रहे थे कि लॉटरी में फ्लैट या प्लॉट मिलने के बाद भी उन्हें सालों तक कब्जा नहीं मिल पाता था। अब सरकार ने इस व्यवस्था को सख्त और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।
सालों से मिल रही थीं शिकायतें
दरअसल, प्रदेश के कई विकास प्राधिकरणों—जैसे लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA), कानपुर विकास प्राधिकरण (KDA), गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) और नोएडा प्राधिकरण—की योजनाओं में आवंटन के बाद कब्जा मिलने में देरी की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। कई मामलों में लोगों ने पूरी रकम जमा कर दी, लेकिन उन्हें अपने फ्लैट या प्लॉट पर कब्जा नहीं मिला। इस वजह से लोगों को प्राधिकरण कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे। कई बार मामला अदालत तक पहुंच जाता था और मिडिल क्लास परिवार आर्थिक और मानसिक दबाव में आ जाते थे।
योगी सरकार का नया आदेश
इन समस्याओं को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों के साथ बैठक की और स्पष्ट निर्देश दिए कि फ्लैट और प्लॉट आवंटियों के साथ किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके बाद आवास विभाग ने नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिन्हें सभी विकास प्राधिकरणों को लागू करना अनिवार्य होगा। सरकार का कहना है कि अब व्यवस्था को पूरी तरह जवाबदेह बनाया जाएगा ताकि लोगों को उनके अधिकार समय पर मिल सकें।
नए नियमों में क्या बदला
नए आदेश के अनुसार अब लॉटरी होने के तुरंत बाद विकास प्राधिकरण को आवंटी को लिखित रूप में यह बताना होगा कि उसे कब तक कब्जा दिया जाएगा। अगर किसी कारण से कब्जा देने में देरी होती है तो उसका स्पष्ट और वैध कारण बताना अनिवार्य होगा। बिना कारण के देरी होने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है। इसके अलावा लॉटरी के बाद बचे हुए खाली फ्लैट और प्लॉट की जानकारी भी अब छिपाई नहीं जा सकेगी। प्राधिकरणों को इसकी रीयल-टाइम जानकारी सीधे राज्य सरकार को भेजनी होगी।
सुविधाएं देने की भी तय होगी समय सीमा
सरकार ने यह भी साफ किया है कि अगर आवंटियों से पार्क, सड़क, नाली, स्ट्रीट लाइट जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए शुल्क लिया गया है, तो प्राधिकरणों को तय समय के भीतर ये सुविधाएं उपलब्ध करानी होंगी। यदि सुविधाएं समय पर नहीं दी गईं तो जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो सकती है। इसके साथ ही रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को भी कब्जा देने की समय सीमा से जोड़ा जाएगा, ताकि खरीदार बिना किसी रुकावट के अपने घर या प्लॉट का कानूनी अधिकार प्राप्त कर सकें।
पुरानी समस्याओं के लिए लगाए जाएंगे विशेष कैंप
सरकार ने उन लोगों को भी राहत देने की योजना बनाई है, जो वर्षों से अपने फ्लैट या प्लॉट के लिए इंतजार कर रहे हैं। इसके लिए विशेष कैंप लगाए जाएंगे, जहां कब्जा मिलने में देरी, ब्याज गणना में गड़बड़ी, विवादित संपत्ति और लंबित फाइलों से जुड़े मामलों को एक ही जगह पर सुलझाने की कोशिश की जाएगी। इन कैंपों के जरिए हजारों पुराने मामलों को निपटाने की तैयारी की जा रही है।
मिडिल क्लास परिवारों को मिलेगी राहत
दरअसल, विकास प्राधिकरणों की योजनाओं में सबसे ज्यादा निवेश मिडिल क्लास परिवार करते हैं। लोग अपनी जीवन भर की बचत लगाकर घर खरीदते हैं, लेकिन कब्जा मिलने में देरी होने से उनका सपना अधूरा रह जाता है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि अब लोगों को सालों तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा और उन्हें समय पर घर या प्लॉट मिल सकेगा।
हाउसिंग सेक्टर में बढ़ेगा भरोसा
सरकार का मानना है कि इन बदलावों से उत्तर प्रदेश के हाउसिंग सेक्टर में भरोसा बढ़ेगा और निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा। साथ ही भूमाफिया और भ्रष्टाचार पर भी अंकुश लगाने में मदद मिलेगी। अब अगर किसी आवंटी को कब्जा देने में अनावश्यक देरी होती है तो संबंधित अधिकारी को जवाब देना होगा। इससे पूरी प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी और जवाबदेह बन सकेगी। - आशीष शुक्ला, सह-संपादक की रिपोर्ट।
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