UPSC परीक्षा को लेकर बड़ी खबर, बार-बार एग्जाम देने पर लगी रोक, जान लें पूरा अपडेट!

Curated By: shivup | Hindi Now Uttar Pradesh • 05 Feb 2026, 04:11 pm
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UPSC ने सिविल सेवा परीक्षा को लेकर बड़ा बदलाव किया है। आयोग ने नया नोटिफिकेशन जारी करते हुए एक बार चयननित अभ्यर्थियों के बाद बार-बार परीक्षा देने पर रोक लगा दी है। आइए खबर में पूरा अपडेट जान लेते हैं।

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने सिविल सेवा परीक्षा को लेकर बड़ा बदलाव किया है। आयोग ने एक बार परीक्षा पास कर सर्विस ज्वाइन कर चुके अभ्यर्थियों को बार-बार परीक्षा देने पर रोक लगा दी है। साथ ही आयोग ने 2026 का नए पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है। इस बार आयोग ने 933 पदों के लिए विज्ञापन जारी किया है और आवेदन की अंतिम तिथि 24 फरवरी तय की गई है। परीक्षा प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाने के लिए परीक्षा केंद्रों पर फेस ऑथेंटिकेशन अनिवार्य किया गया है, यानी उम्मीदवारों को पहचान सत्यापन के बाद ही प्रवेश मिलेगा। साथ ही, चयन के बाद बार-बार परीक्षा देकर बेहतर रैंक हासिल करने का रास्ता भी अब पहले जैसा खुला नहीं रहेगा, जिससे नए अभ्यर्थियों को अधिक अवसर मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।


सेवा में चयन के बाद सीमित हो गया दोबारा परीक्षा देने का मौका
नए नियमों के मुताबिक, यदि किसी उम्मीदवार का चयन सिविल सेवा में हो जाता है तो उसे रैंक सुधारने के लिए केवल एक अतिरिक्त अवसर दिया जाएगा। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी अभ्यर्थी का चयन 2026 में IPS या किसी ग्रुप-ए सेवा में होता है, तो वह 2027 में एक बार फिर परीक्षा देकर बेहतर रैंक हासिल करने की कोशिश कर सकता है। हालांकि, इसके लिए ट्रेनिंग जॉइन न करने की एक बार की छूट जरूरी होगी। इसके बाद यदि कोई फिर परीक्षा देना चाहता है तो उसे अपनी वर्तमान सेवा से इस्तीफा देना अनिवार्य होगा। आयोग का मानना है कि इससे एक ही उम्मीदवार द्वारा बार-बार सीट रोकने की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी।


IPS और अन्य सेवाओं को लेकर भी नियम सख्त, ट्रेनिंग जॉइन करना जरूरी
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि पहले से IPS में चयनित उम्मीदवार CSE-2026 के जरिए फिर से IPS का विकल्प नहीं चुन सकेंगे। यदि कोई उम्मीदवार प्रीलिम्स पास करने के बाद IAS या IFS में चयनित हो जाता है, तो उसे मेन्स परीक्षा देने की अनुमति नहीं मिलेगी। साथ ही, यदि चयनित उम्मीदवार ट्रेनिंग जॉइन नहीं करता और न ही छूट लेता है, तो उसकी सेवा आवंटन स्वतः रद्द हो सकता है। इससे चयन प्रक्रिया को अधिक अनुशासित और व्यवस्थित बनाने की कोशिश की जा रही है, ताकि पद लंबे समय तक खाली न रहें।


हर साल लाखों उम्मीदवार, प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही
सिविल सेवा परीक्षा देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में गिनी जाती है। पिछले वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि हर साल करीब 10 से 13 लाख उम्मीदवार आवेदन करते हैं, लेकिन अंतिम चयन कुछ हजार उम्मीदवारों का ही हो पाता है। 2025 में करीब 10 लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था, जिनमें से सीमित उम्मीदवार ही अंतिम चयन तक पहुंचे। इसी बीच संसद में यह सवाल भी उठा कि क्या लद्दाख के उम्मीदवारों को भाषा पेपर से छूट दी जाएगी, जिस पर सरकार ने फिलहाल कोई नया निर्णय घोषित नहीं किया है। आने वाले समय में परीक्षा नियमों में और सुधार संभव हैं।

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