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Hindi Now Uttar Pradesh • 14 Jan 2026, 12:56 pm
उत्तर प्रदेश तेजी से विकसित हो रही अवसंरचना और स्पष्ट औद्योगिक नीतियों के चलते वैश्विक कंपनियों के लिए दीर्घकालिक निवेश का पसंदीदा केंद्र बनता जा रहा है। उद्योग जगत के विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में यूपी ग्लोबल कंपनियों का एक बड़ा हब बनकर उभरेगा। इसी दिशा में प्रदेश सरकार ने 1000 से अधिक ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) स्थापित करने का लक्ष्य तय किया है, जिससे पांच लाख से अधिक युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलने की उम्मीद है।
क्या होते हैं ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC)
ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर वह इकाई होती है, जहां कोई बहुराष्ट्रीय कंपनी अपने कोर और रणनीतिक कार्य अपने ही कर्मचारियों के माध्यम से कराती है, न कि किसी थर्ड पार्टी वेंडर से। इसमें आईटी सेवाएं, इंजीनियरिंग, रिसर्च, डाटा एनालिटिक्स और मैनेजमेंट जैसे महत्वपूर्ण काम शामिल होते हैं। यूपी जीसीसी नीति 2024 के जरिए योगी सरकार ने निवेशकों को नीतिगत स्पष्टता और दीर्घकालिक दृष्टिकोण दिया है। इससे पहले वैश्विक कंपनियों की सबसे बड़ी चिंता नियमों की अनिश्चितता और प्रक्रियाओं में देरी को लेकर थी। नई नीति में शुरुआत से ही नियम, शर्तें और दायित्व स्पष्ट कर दिए गए हैं, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा है और निर्णय लेने की गति तेज हुई है। यही वजह है कि वर्तमान में प्रदेश में करीब 90 जीसीसी सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं।
स्थायी औद्योगिक ढांचे को दी जा रही प्राथमिकता
प्रदेश सरकार का फोकस केवल निवेश आकर्षित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थायी और मजबूत औद्योगिक ढांचे के निर्माण पर भी है। भूमि आधारित प्रोत्साहन निवेशकों की शुरुआती लागत को कम करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। सरकार की सोच है कि यदि निवेशक को प्रारंभिक चरण में संरचनात्मक सहयोग मिले, तो वह लंबे समय तक प्रदेश से जुड़ा रहेगा। इसी कारण अस्थायी कार्यालयों या किराए की व्यवस्था के बजाय स्थायी औद्योगिक परिसरों को प्राथमिकता दी जा रही है। साथ ही परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए जवाबदेही तय की गई है, ताकि योजनाएं तय समयसीमा में धरातल पर उतर सकें और निवेशकों का भरोसा बना रहे।
रोजगार और क्षेत्रीय विकास को मिलेगा बढ़ावा
ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स के माध्यम से यूपी में हाई-वैल्यू रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। सूचना प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, डाटा साइंस और प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में स्थानीय युवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर का अनुभव मिल रहा है। इससे न केवल प्रदेश की मानव संसाधन क्षमता मजबूत होगी, बल्कि प्रतिभा पलायन पर भी प्रभावी नियंत्रण लगेगा। सरकार का विशेष जोर कम विकसित क्षेत्रों में निवेश को प्रोत्साहित करने पर है, जिससे क्षेत्रीय असंतुलन दूर हो और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिल सके।
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