AI और सोशल मीडिया को लेकर आज से ये नई गाइडलाइन लागू, आप भी जान लें, वरना गले पड़ सकती है मुसीबत

Curated By: shivup | Hindi Now Uttar Pradesh • 20 Feb 2026, 01:46 pm
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केंद्र सरकार ने एआई से बने कंटेंट पर अनिवार्य लेबल और 3 घंटे में आपत्तिजनक पोस्ट हटाने का नियम लागू किया है। नए आईटी संशोधन नियम 20 फरवरी 2026 से प्रभावी हैं, जिनका उद्देश्य डीपफेक और फर्जी सूचनाओं पर सख्त रोक लगाना है।

डिजिटल दुनिया में तेजी से बढ़ते एआई इस्तेमाल के बीच केंद्र सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं। 20 फरवरी 2026 से लागू नए आईटी संशोधन नियमों के तहत अब अगर कोई फोटो, वीडियो या ऑडियो एआई की मदद से तैयार किया गया है, तो उस पर स्पष्ट ‘ऑथेंटिसिटी लेबल’ लगाना अनिवार्य होगा। 10 फरवरी को जारी नोटिफिकेशन के बाद सोशल मीडिया कंपनियों को शिकायत मिलने के सिर्फ 3 घंटे के भीतर आपत्तिजनक कंटेंट हटाना होगा, जबकि पहले यह समयसीमा 36 घंटे थी। सरकार का कहना है कि डीपफेक, फर्जी वीडियो और गलत सूचनाओं के बढ़ते मामलों को देखते हुए यह कदम जरूरी हो गया था, ताकि इंटरनेट को ज्यादा सुरक्षित और भरोसेमंद बनाया जा सके।


डिजिटल कंटेंट पर अनिवार्य होगा ‘AI जनरेटेड’ लेबल

नए नियमों के अनुसार, एआई से तैयार किसी भी ऑडियो, वीडियो या फोटो पर साफ तौर पर “एआई जनरेटेड” या समान लेबल दिखना जरूरी होगा। 19 फरवरी को आयोजित एआई समिट में प्रधानमंत्री Narendra Modi ने भी कहा था कि जैसे खाने के पैकेट पर न्यूट्रिशन लेबल होता है, वैसे ही डिजिटल कंटेंट पर ऑथेंटिसिटी लेबल होना चाहिए, ताकि लोगों को असली और फैब्रिकेटेड सामग्री में फर्क समझ आ सके। इसके साथ ही हर एआई कंटेंट में एक ‘टेक्निकल मार्कर’ या मेटाडेटा जोड़ा जाएगा, जिसे डिजिटल डीएनए की तरह माना जा रहा है। इसमें कंटेंट बनने की तारीख, इस्तेमाल हुए टूल और पहली अपलोड लोकेशन जैसी जानकारी दर्ज रहेगी, जिससे जरूरत पड़ने पर असली स्रोत तक पहुंचा जा सके।


लेबल से छेड़छाड़ पर सख्त कार्रवाई

सरकार ने साफ किया है कि एआई कंटेंट से लेबल या मेटाडेटा हटाने की कोशिश गैर-कानूनी होगी। पहले कई मामलों में लोग एडिटिंग करके वॉटरमार्क हटा देते थे, जिससे कंटेंट असली जैसा दिखता था। अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को ऐसी तकनीक लागू करनी होगी कि यदि कोई लेबल से छेड़छाड़ करे तो कंटेंट स्वतः हट जाए। चाइल्ड पोर्नोग्राफी, अश्लीलता, धोखाधड़ी, हथियारों से जुड़ी संवेदनशील जानकारी या किसी की नकल उतारने जैसे मामलों में एआई का इस्तेमाल गंभीर अपराध माना जाएगा। ऐसे मामलों में कार्रवाई सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 और भारतीय न्याय संहिता के तहत की जाएगी।


3 घंटे की नई डेडलाइन और प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी

आईटी नियमों में संशोधन के बाद अब कोर्ट या सरकार के आदेश पर 3 घंटे के भीतर कंटेंट हटाना अनिवार्य होगा। अगर प्लेटफॉर्म तय समयसीमा में कार्रवाई नहीं करता, तो उसकी ‘सेफ हार्बर’ कानूनी सुरक्षा खत्म हो सकती है। साथ ही, यूजर को पोस्ट अपलोड करते समय यह डिक्लेरेशन देना होगा कि कंटेंट एआई से बनाया गया है या नहीं। कंपनियों को ऐसे टूल्स लगाने होंगे जो इस दावे की जांच कर सकें। आईटी मंत्रालय का कहना है कि इन कदमों से जनरेटिव एआई से जुड़ी मिस-इनफॉर्मेशन, इम्पर्सनेशन और चुनावी हेरफेर जैसी चुनौतियों से निपटना आसान होगा और इंटरनेट ज्यादा जवाबदेह बनेगा।



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