अल-फलाह यूनिवर्सिटी में बहुत बड़ा एक्शन, हिल गया विश्वविद्यालय प्रशासन, रात में लगी आदालत, जानें पूरा मामला

Curated By: Shiv Vishwakarma | Hindi Now Uttar Pradesh • 19 Nov 2025, 10:52 am
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दिल्ली कार ब्लास्ट मामले में सख्त एक्शन लिया गया है। अलफला यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जावेद अहमद सिद्दीकी को 13 दिन की ईडी हिरासत में भेज दिया गया है। उसके लिए रात में ही अदालत लगी और उसे ईडी रिमांड पर भेज दिया गया।

दिल्ली की एक विशेष अदालत ने अल-फलाह ग्रुप के चेयरमैन और अल-फलाह विश्वविद्यालय के संस्थापक जावेद अहमद सिद्दीकी को 13 दिन की ईडी हिरासत में भेज दिया है। देर रात सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शीतल चौधरी प्रधान ने अपने चैंबर में मामले की सुनवाई की, जहां सिद्दीकी को रात 11 बजे पेश किया गया। अदालत ने रिमांड आदेश में कहा कि सिद्दीकी के खिलाफ बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी, फर्जी मान्यता प्राप्त करने के झूठे दावे और विश्वविद्यालय से हासिल धन को अन्यत्र स्थानांतरित करने जैसे गंभीर आरोपों में संलिप्त होने के पर्याप्त आधार हैं। इन्हीं कारणों से उनकी ईडी हिरासत को जरूरी माना गया है।


ईडी ने सिद्दीकी को 18 नवंबर 2025 की देर रात पीएमएलए की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया था। एजेंसी का कहना है कि जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और हिरासत में पूछताछ जरूरी है, ताकि मनी लॉन्ड्रिंग के पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके। एजेंसी ने यह भी तर्क दिया कि यदि आरोपी को हिरासत में नहीं रखा गया, तो उसके सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने या गवाहों को प्रभावित करने की आशंका बनी रह सकती है। ईडी ने अदालत को यह भी बताया कि अपराध से अर्जित संपत्तियों के नष्ट होने की आशंका को देखते हुए विस्तार से पूछताछ जरूरी है।



अदालत के समक्ष प्रस्तुत वित्तीय रिपोर्ट के अनुसार वित्तीय वर्ष 2018-19 से 2024-25 के बीच अल-फलाह संस्थान ने शिक्षा शुल्क आदि से लगभग 415.10 करोड़ रुपये की आय अर्जित की। ईडी का दावा है कि यह आय ‘अपराध से प्राप्त धन’ की श्रेणी में आती है, क्योंकि विश्वविद्यालय ने इस अवधि में अपनी मान्यता और वैधानिक स्थिति को लेकर जनता को गुमराह किया। अदालत ने माना कि यह धनराशि धोखाधड़ी, जालसाजी और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर प्राप्त हुई थी, जो पीएमएलए की अनुसूची में शामिल अपराध हैं। अदालत ने इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए हिरासत में पूछताछ को उचित ठहराया।


जावद सिद्दीकी को ईडी ने उस समय गिरफ्तार किया, जब एजेंसी ने विश्वविद्यालय और उससे संबंधित करीब 25 ठिकानों पर छापेमारी की थी। ईडी का कहना है कि उनके पास पर्याप्त सबूत हैं जो सिद्दीकी की भूमिका को मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय अनियमितताओं से जोड़ते हैं। इसके अलावा, लाल किला कार बम धमाका मामले की जांच के दौरान भी अल-फलाह विश्वविद्यालय का नाम सामने आया था। इस विस्फोट को अंजाम देने वाला डॉक्टर उमर नबी इसी विश्वविद्यालय के अस्पताल से जुड़ा हुआ था, जबकि सफेदपोश आतंकी नेटवर्क में पकड़े गए कई लोगों के तार भी इस संस्थान से जुड़े पाए गए। दिल्ली धमाके की जांच आगे बढ़ने पर विश्वविद्यालय के वित्तीय लेन-देन ईडी की जांच के दायरे में आए, जिसके बाद जावद सिद्दीकी की गिरफ्तारी की गई। एजेंसी ने अपनी कार्रवाई दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा द्वारा दर्ज दो एफआईआर के आधार पर शुरू की थी।


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