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shivup |
Hindi Now Uttar Pradesh • 27 Feb 2026, 05:58 pm
यौन उत्पीड़न के आरोपों से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी है और अग्रिम जमानत पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा की अदालत ने स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय आने तक शंकराचार्य की गिरफ्तारी नहीं होगी, लेकिन उन्हें जांच में पूरा सहयोग करना होगा। मामले की अगली सुनवाई मार्च के तीसरे सप्ताह में होने की संभावना है। अदालत में शंकराचार्य की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पी.एन. मिश्रा ने पक्ष रखा, जबकि राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल उपस्थित हुए।
मामले की पृष्ठभूमि और अदालत में हुई बहस
यह मामला बटुकों के कथित यौन उत्पीड़न से जुड़ा है। शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी ने जिला अदालत में याचिका दाखिल की थी, जिसके बाद झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज की गई। एफआईआर में शंकराचार्य के साथ उनके एक शिष्य और अन्य अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया है। हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने जमानत का कड़ा विरोध किया और तर्क दिया कि शंकराचार्य प्रभावशाली व्यक्ति हैं, जमानत मिलने पर मामले को प्रभावित कर सकते हैं। वहीं बचाव पक्ष ने शिकायतकर्ता की पृष्ठभूमि और दस्तावेजों को अदालत के सामने रखते हुए आरोपों को निराधार बताया। कोर्ट ने पुलिस से पीड़ित बच्चों की स्थिति और उम्र से जुड़े दस्तावेजों पर भी सवाल किए।
धमकी प्रकरण और मठ में जश्न का माहौल
इसी बीच शंकराचार्य के एक वकील को बम से उड़ाने की धमकी देने के मामले में पुलिस ने आरोपी अजीत कुमार सरोज को गिरफ्तार कर लिया है। पूछताछ में आरोपी ने कथित रूप से बताया कि उसने पड़ोसी को फंसाने के लिए मैसेज भेजा था। उधर, गिरफ्तारी पर रोक लगने के बाद काशी स्थित विद्यामठ में समर्थकों के बीच जश्न का माहौल देखा गया। लोगों ने मिठाई बांटी और धार्मिक नारे लगाए। शंकराचार्य ने कहा है कि कोर्ट का जो भी फैसला होगा, वह स्वीकार करेंगे।
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