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shivnowup |
Hindi Now Uttar Pradesh • 15 Jan 2026, 04:39 pm
कानपुर फर्टिलाइजर एंड केमिकल्स लिमिटेड (केएफसीएल) के संचालन को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। पनकी स्थित इस बंद पड़े यूरिया प्लांट को अब अदाणी समूह चलाएगा। एनसीएलटी ने 14 नवंबर 2025 को अदाणी समूह की बिड को मंजूरी दे दी थी। इसके बाद 20 दिसंबर 2025 को अदाणी समूह के अधिकारियों ने प्लांट का निरीक्षण किया। इस दौरान प्लांट की उत्पादन क्षमता, मशीनरी, संपत्तियों और कर्मचारियों की स्थिति का आकलन किया गया। गौरतलब है कि यह प्लांट पिछले साल एक अप्रैल से बंद पड़ा था। इससे पहले इसका संचालन जेपी एसोसिएट ग्रुप कर रहा था। केएफसीएल में पहले ‘चांद छाप’ और बाद में ‘भारत छाप’ यूरिया का उत्पादन किया जाता था, जिसकी बाजार में अच्छी मांग रही है।
गैस और बिजली संकट से ठप हुआ था उत्पादन
केएफसीएल में प्रतिदिन करीब 2100 मीट्रिक टन यूरिया का उत्पादन होता था, लेकिन बकाया भुगतान के चलते हालात बिगड़ते चले गए। पिछले साल गेल ने बकाया राशि न मिलने पर गैस की आपूर्ति बंद कर दी थी। प्रबंधन ने उस समय दलील दी थी कि बाजार में बिक रहे यूरिया और सरकार से मिलने वाली सब्सिडी से भुगतान कर दिया जाएगा। इसी क्रम में दिसंबर 2024 और जनवरी 2025 में गेल को 538 करोड़ रुपये का भुगतान भी किया गया। हालांकि इसके बाद केस्को ने बिजली बिल के बकाया को लेकर कनेक्शन काट दिया। हालात तब और बिगड़ गए जब केंद्र सरकार की ओर से सब्सिडी भुगतान के लिए तय एनर्जी मानक 31 मार्च 2025 के बाद नवीनीकृत नहीं किए गए। पर्याप्त सब्सिडी मानक के अभाव में एक अप्रैल 2025 से प्लांट का उत्पादन पूरी तरह बंद करना पड़ा।
कर्मचारियों का तबादला, वेतन विवाद कोर्ट में
उत्पादन ठप होने के साथ ही कर्मचारियों को हटाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई थी। बड़ी संख्या में कर्मचारियों का जेपी एसोसिएट ग्रुप की अन्य इकाइयों में तबादला कर दिया गया। फिलहाल प्लांट में करीब 100 स्थायी और अस्थायी कर्मचारी ही बचे हैं। इन कर्मचारियों के वेतन भुगतान को लेकर विवाद श्रम न्यायालय में विचाराधीन है। भारतीय उर्वरक श्रमिक संघ के अध्यक्ष सुखदेव मिश्रा के मुताबिक, अदाणी समूह के आने से कर्मचारियों में एक बार फिर उम्मीद जगी है। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने प्लांट की मौजूदा स्थिति और संपत्तियों का बारीकी से मूल्यांकन किया है। माना जा रहा है कि सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद उत्पादन दोबारा शुरू किया जा सकता है।
1500 करोड़ से हुआ था प्लांट का पुनर्जीवन
पनकी स्थित यह फर्टिलाइजर प्लांट वर्ष 1967 में कमीशन हुआ था और अपने इतिहास में कई बार बंदी झेल चुका है। आईईएल और डंकन के दौर के बाद यह प्लांट लगभग दस वर्षों तक बंद रहा। जेपी ग्रुप ने 2012 से 2015 के बीच करीब 1500 करोड़ रुपये निवेश कर इसे फिर से चालू किया था। उस समय करीब 90 करोड़ रुपये का श्रमिकों और कर्मचारियों का बकाया भी चुकाया गया था। साथ ही फीड स्टॉक को नाफ्था से प्राकृतिक गैस में बदला गया, जिससे उत्पादन लागत कम हुई। पिछले दस वर्षों में यह प्लांट अपनी क्षमता के 90 प्रतिशत से अधिक उत्पादन कर रहा था। अब अदाणी समूह के हाथ में जाने के बाद एक बार फिर केएफसीएल के पुनर्जीवन की उम्मीद जताई जा रही है।
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