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shivnowup |
Hindi Now Uttar Pradesh • 15 Jan 2026, 03:48 pm
कारागार विभाग में खाद्य तेल और मसालों की आपूर्ति से जुड़े टेंडरों में बड़े स्तर पर अनियमितता का मामला सामने आया है। आरोप है कि पूरी टेंडर प्रक्रिया को इस तरह अंजाम दिया गया, जिससे एक ही चहेती कंपनी को सभी दस टेंडर आवंटित हो गए। इस पूरे मामले ने शासन स्तर पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसके बाद जांच के आदेश जारी किए गए हैं। बताया जा रहा है कि कारागार विभाग ने पिछले वर्ष खाद्य पदार्थों, मसालों और तेल की आपूर्ति के लिए कुल 9 टेंडर और एक विद्युत यांत्रिकी से जुड़ा टेंडर जारी किया था। हैरानी की बात यह है कि इन सभी टेंडरों में अंततः एक ही कंपनी को ठेका दे दिया गया, जिससे पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
टेक्निकल बिड में छंटनी, फाइनेंशियल बिड में एक ही विजेता
इन टेंडरों की टेक्निकल बिड में शिव शक्ति इंटरप्राइजेज, एमजी ऑर्गेनाइजेशन और राजमाता इंफ्राकॉन प्राइवेट लिमिटेड नाम की तीन कंपनियां क्वालीफाई हुई थीं। इसके बाद जब फाइनेंशियल बिड खोली गई, तो केवल मेसर्स शिव शक्ति इंटरप्राइजेज को ही योग्य घोषित किया गया। नतीजतन, सभी दस टेंडर इसी एक कंपनी को सौंप दिए गए। यही नहीं, अलग-अलग खाद्य सामग्री के टेंडरों में बड़ी संख्या में कंपनियों के आवेदन के बावजूद अधिकांश को डिसक्वालीफाई कर दिया गया। हल्दी आपूर्ति के टेंडर में 11, कालीमिर्च में 12, बड़ी इलायची और लाल मिर्च में 13-13 और सरसों के तेल में 15 कंपनियां शामिल थीं, लेकिन अंत में वही तीन कंपनियां टेक्निकल बिड में बचीं और फाइनल में शिव शक्ति इंटरप्राइजेज को ठेका मिल गया।
टेंडर खोलने के समय पर भी उठे सवाल
टेंडर प्रक्रिया के समय को लेकर भी गंभीर सवाल सामने आए हैं। जानकारी के मुताबिक, टेंडर में आवेदन करने की अंतिम समयसीमा 23 अक्टूबर 2025 की रात आठ बजे तय थी। लेकिन महज आधे घंटे बाद ही रात 8:30 बजे सभी टेंडर खोल दिए गए। इतनी जल्दी टेंडर खोलने को लेकर संदेह जताया जा रहा है कि क्या प्रक्रिया पहले से तय थी। जिन दस टेंडरों पर सवाल उठ रहे हैं, उनमें जीईएम पोर्टल के कई बिड नंबर शामिल हैं, जिनकी अब जांच की मांग तेज हो गई है। विपक्ष और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया नियमों के खिलाफ प्रतीत होती है और इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है।
शासन ने लिया संज्ञान, जांच के आदेश जारी
मामले में एक विधायक द्वारा शासन को लिखित शिकायत दी गई, जिसमें टेंडरों में भारी गड़बड़ी के आरोप लगाए गए। शिकायत पर संज्ञान लेते हुए शासन ने जांच के आदेश दिए हैं। संयुक्त सचिव सूर्य प्रकाश मिश्रा ने 16 दिसंबर 2025 को डीजी कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवा को पत्र भेजकर पूरे मामले की जांच कर रिपोर्ट तलब की है। हालांकि, डीजी जेल पीसी मीणा का कहना है कि उन्हें इस तरह के किसी मामले की जानकारी नहीं है। अब निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह साफ हो सके कि टेंडर प्रक्रिया में वास्तव में नियमों का पालन हुआ या फिर बड़े स्तर पर खेल किया गया।
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