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shivnowup |
Hindi Now Uttar Pradesh • 15 Jan 2026, 02:04 pm
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की कथित ब्रिटिश नागरिकता से जुड़े मामले में लखनऊ की विशेष MP-MLA कोर्ट ने सुनवाई पूरी कर ली है। विशेष न्यायाधीश एवं तृतीय अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM) आलोक वर्मा की अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब इस हाई-प्रोफाइल मामले में 28 जनवरी 2026 को अंतिम निर्णय सुनाया जाएगा। यह मामला पहले रायबरेली की विशेष MP-MLA अदालत में विचाराधीन था, लेकिन बाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ के आदेश पर इसे लखनऊ स्थानांतरित कर दिया गया था। ट्रांसफर के बाद इस केस को क्रिमिनल मिस केस के रूप में पुनः क्रमांकित करते हुए केस संख्या 31/2026 दी गई है।
आठ दिन चली सुनवाई, याचिकाकर्ता ने खुद की पैरवी
इस मामले के याचिकाकर्ता एस. विग्नेश शिशिर ने अदालत में स्वयं अपनी पैरवी की। लगातार आठ दिनों तक चली सुनवाई के दौरान करीब 20 घंटे से अधिक समय तक बहस हुई। याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट के कई अहम और ऐतिहासिक फैसलों, विभिन्न कानूनी नजीरों और विस्तृत तर्कों के आधार पर अपना पक्ष अदालत के समक्ष रखा। सुनवाई के दौरान उन्होंने यह दावा किया कि राहुल गांधी की नागरिकता से जुड़ा मामला न केवल संवैधानिक बल्कि राष्ट्रीय कानूनों से भी जुड़ा हुआ है, इसलिए इसकी गंभीरता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
45 एनेक्सचर और 310 पन्नों की पत्रावली रिकॉर्ड में
अदालत ने इस प्रकरण से जुड़े 45 एनेक्सचर, एक सीलबंद लिफाफा और 310 पन्नों की विस्तृत पत्रावली को रिकॉर्ड पर लिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इन सभी दस्तावेजों को अंतिम निर्णय के उद्देश्य से स्वीकार किया गया है। याचिका में राहुल गांधी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के साथ-साथ आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम 1923, पासपोर्ट अधिनियम 1967 और विदेशी अधिनियम 1946 के तहत
एफआईआर दर्ज कराने का आदेश देने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि इस पूरे मामले में गंभीर कानूनी उल्लंघन हुए हैं।
गृह मंत्रालय और हाईकोर्ट में भी पेश हो चुके हैं साक्ष्य
याचिकाकर्ता विग्नेश शिशिर का दावा है कि राहुल गांधी ब्रिटिश नागरिक हैं और उनकी भारतीय नागरिकता रद्द की जानी चाहिए। इसके समर्थन में उन्होंने ब्रिटेन सरकार से जुड़े कुछ ईमेल और दस्तावेज जुटाने का दावा किया है, जिन्हें अदालत में पेश किया गया है। उनके अनुसार इस प्रकरण से जुड़े साक्ष्य पहले केंद्रीय गृह मंत्रालय और इलाहाबाद हाईकोर्ट के समक्ष भी रखे जा चुके हैं। भारत सरकार ने इस संबंध में ब्रिटेन सरकार से आधिकारिक संपर्क किया है, हालांकि अभी तक वहां से कोई औपचारिक जवाब नहीं मिला है। याचिकाकर्ता का यह भी कहना है कि कुछ गोपनीय दस्तावेज उन्होंने जांच के लिए सीबीआई को सौंपे हैं।
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