एक झोला लेकर आया था किडनी गैंग से जुड़ा शिवम अग्रवाल, दो साल में बन गया करोड़पति, अकेले ट्रांसप्लांट करा डालीं 50 किडनियां

Curated By: shivup | Hindi Now Uttar Pradesh • 03 Apr 2026, 06:10 pm
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कानपुर किडनी रैकेट में आरोपी शिवम अग्रवाल की कहानी सामने आई है। किराए के कमरे से शुरू हुआ सफर 50 किडनी ट्रांसप्लांट तक पहुंचा, जहां वह पूरे नेटवर्क का मैनेजमेंट संभाल रहा था।

कानपुर में सामने आए किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट में नया खुलासा हुआ है। इस पूरे सिंडिकेट का अहम किरदार रहे शिवम अग्रवाल के बारे में चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। गीता नगर में किराए पर रहने वाले शिवम का अतीत बेहद साधारण था, लेकिन कुछ ही सालों में उसकी लाइफस्टाइल अचानक बदल गई। मकान मालिक के परिवार और आसपास के लोगों ने बताया कि वह पहले मामूली सामान के साथ रहने आया था, लेकिन बाद में महंगी गाड़ियों और शौक में डूब गया। पुलिस के मुताबिक, कानपुर में हुए करीब 50 किडनी ट्रांसप्लांट में उसकी भूमिका सामने आई है।


किराए के कमरे से शुरू हुआ सफर, बाद में बदल गई जिंदगी

गीता नगर निवासी गोलू यादव के अनुसार, करीब दो साल पहले शिवम उनके घर में 2500 रुपए महीने पर किराए पर रहने आया था। उसके पास सिर्फ एक झोला, कुछ बर्तन और छोटा सिलेंडर था। कुछ समय बाद वह अपनी पत्नी को भी साथ ले आया, लेकिन घर में आए दिन विवाद और मारपीट होती थी। पत्नी ने आरोप लगाया था कि शिवम का एक नर्स से अफेयर है। बाद में दोनों के बीच तलाक हो गया। मकान मालिक के मुताबिक, पत्नी के जाने के बाद शिवम का व्यवहार और बिगड़ गया और वह अक्सर नशे में रहता था, जिसके बाद उसे मकान खाली कराना पड़ा।


अचानक बदली लाइफस्टाइल, महंगी गाड़ी और शराब का शौक

स्थानीय लोगों ने बताया कि मकान छोड़ने के बाद शिवम पास ही दूसरे घर में रहने लगा और फिर दूसरी शादी कर ली। कुछ ही समय में उसने अपाचे बाइक और फिर अर्टिगा कार खरीद ली। इलाके के दुकानदारों के अनुसार, वह महंगी शराब पीता था और जुए-सट्टे में लाखों रुपए लगाता था। उसकी बातचीत का तरीका ऐसा था कि लोग आसानी से उसके झांसे में आ जाते थे। बताया जा रहा है कि वह अक्सर बाहर घूमने जाता और सोशल मीडिया पर अपनी लाइफस्टाइल दिखाता था।


50 किडनी ट्रांसप्लांट में भूमिका, बड़ा नेटवर्क सामने

डीसीपी वेस्ट कासिम आबिदी के अनुसार, कानपुर में हुए करीब 50 किडनी ट्रांसप्लांट में शिवम की मुख्य भूमिका रही है। वह पूरे नेटवर्क का मैनेजमेंट संभालता था। डील तय होने के बाद डोनर और रिसीवर को लाना, उनकी जांच कराना, अस्पताल में भर्ती कराना और ऑपरेशन की पूरी व्यवस्था वही करता था। डॉक्टर रोहित की टीम ऑपरेशन के लिए बाहर से आती थी और प्रक्रिया पूरी होने के बाद वापस लौट जाती थी। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, शिवम पहले एंबुलेंस चलाता था, लेकिन बाद में पूरी तरह इस अवैध धंधे में शामिल हो गया।


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