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shivup |
Hindi Now Uttar Pradesh • 23 Feb 2026, 01:50 pm
राजधानी लखनऊ में संवेदनशीलता और मानवता की मिसाल उस समय देखने को मिली, जब 42 वर्षीय ब्रेन डेड युवक के अंगदान से तीन लोगों को नया जीवन मिला और दो लोगों की आंखों की रोशनी लौट आई। संदीप कुमार सड़क दुर्घटना के बाद संजय गांधी स्नातकोत्तर चिकित्सा विज्ञान संस्थान के आघात केंद्र में भर्ती थे। 22 फरवरी को चिकित्सकों ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित किया। इसके बाद परिजनों को समझाया गया और अंगदान के लिए सहमति ली गई। सहमति मिलते ही दो गुर्दों का प्रत्यारोपण यहीं के जरूरतमंद मरीजों में किया गया, जबकि यकृत और दोनों नेत्र किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी भेजे गए, जहां अन्य मरीजों के उपचार की तैयारी की गई।
हरित मार्ग बनाकर समय से पहुंचाए गए अंग
यकृत और नेत्रों को सुरक्षित व समय पर पहुंचाने के लिए पुलिस ने विशेष हरित मार्ग तैयार किया। शाम 6 बजकर 14 मिनट पर एंबुलेंस संस्थान से रवाना हुई और 6 बजकर 32 मिनट पर विश्वविद्यालय पहुंच गई। मार्ग में आने वाले सभी चौराहों को पहले से सूचित कर यातायात को रोका गया था। पुलिस की गाड़ियों की निगरानी में एंबुलेंस बिना रुकावट आगे बढ़ती रही। आम लोग भी एंबुलेंस को देखकर अपने वाहन रोकते दिखाई दिए। इस त्वरित व्यवस्था के कारण अंग सुरक्षित अवस्था में निर्धारित स्थान तक पहुंचे और प्रत्यारोपण की प्रक्रिया शीघ्र शुरू की जा सकी।
दुर्घटना के बाद परिवार ने दिखाई सहमति, कई घरों में जगी उम्मीद
7 फरवरी को घर से बिजली का बिल जमा करने निकले संदीप कुमार सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। कई स्थानों पर उपचार के बाद 21 फरवरी को उन्हें यहां भर्ती कराया गया। अगले दिन चिकित्सकों ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया। पत्नी की सहमति मिलने पर विशेषज्ञों की टीम ने दोनों गुर्दे निकाले, जिन्हें उन्नाव और मैनपुरी की दो महिलाओं में प्रत्यारोपित किया गया। दोनों लंबे समय से नियमित शोधन उपचार पर निर्भर थीं। यकृत एक गंभीर रोगी को प्रत्यारोपित किया जा रहा है, जबकि नेत्रों को नेत्र बैंक में सुरक्षित रखा गया है। चिकित्सकों ने कहा कि इस अंगदान से कई परिवारों में नई आशा जगी है।
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