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Shiv Vishwakarma |
Hindi Now Uttar Pradesh • 02 Dec 2025, 08:18 pm
लखनऊ में डॉग लवर्स की तरफ से मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखने की मुहिम लगातार जारी है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को भेजे गए पत्र में स्ट्रीट डॉग शेल्टर हाउस भेजने से जुड़े आदेश पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया गया है। एनिमल लवर खुशबू ने बताया कि वे लंबे समय से स्ट्रीट डॉग्स की सुरक्षा को लेकर संघर्ष कर रहे हैं और अब तक 10 हजार से अधिक लोग पत्र लिखकर अपना विरोध जता चुके हैं। उनका कहना है कि 7 नवंबर को आए फैसले का वे पूरी तरह विरोध करते हैं, क्योंकि यह न तो व्यवहारिक है और न ही मानवीय है।
खुशबू का कहना है कि वे कुत्तों की सुरक्षा के लिए हर स्तर पर प्रयास कर रहे हैं। कभी सड़कों पर प्रदर्शन के जरिए तो अब पत्र अभियान चलाकर कोशिश जारी है। उनका तर्क है कि लावारिस कुत्तों को हटाने का निर्णय उचित नहीं है, क्योंकि इसके लिए कोई ठोस व्यवस्था मौजूद नहीं है। उन्होंने ABC नियम को विस्तार देने और समाज में जागरूकता बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया।
कुत्तों को शेल्टर हाउस भेजने का आदेश व्यावहारिक नहीं
डॉग लवर्स का कहना है कि कुत्तों को हटाने या स्थानांतरित करने का आदेश व्यावहारिक नहीं है। देश में इतनी बड़ी संख्या में स्ट्रीट डॉग्स के लिए पर्याप्त शेल्टर नहीं हैं और न ही कोई व्यवस्थित ढांचा मौजूद है। ऐसे में उनका सामूहिक विस्थापन करना न केवल कठिन है, बल्कि इससे जानवरों के साथ-साथ पूरे समुदाय पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
स्थायी आश्रय देने संबंधी आदेश वापस ले कोर्ट
खुशबू ने यह भी कहा कि स्ट्रीट डॉग्स को स्थायी आश्रय देने संबंधी आदेश वापस लिया जाना चाहिए। उन्होंने ABC नियम 2001 के तहत पशु जन्म नियंत्रण कार्यक्रमों के लिए धन और संसाधन बढ़ाने की मांग की। इसके अलावा, रेबीज टीकाकरण को शत-प्रतिशत सुनिश्चित करने के लिए बड़े पैमाने पर अभियान चलाने की जरूरत पर भी जोर दिया।
कुत्तों को गोद लेने की पहल को बढ़ावा देने की आवश्यकता
खुशबू ने कहा कि समाज में कुत्तों के प्रति सकारात्मक रवैया अपनाकर उन्हें गोद लेने की पहल को बढ़ावा देना बेहद जरूरी है। इससे न केवल उनकी देखभाल सुनिश्चित होगी, बल्कि इंसानों और जानवरों के बीच सामंजस्य भी बेहतर होगा।
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