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shivup |
Hindi Now Uttar Pradesh • 26 Feb 2026, 04:48 pm
लखनऊ विश्वविद्यालय स्थित लाल बारादरी को सील किए जाने के विरोध में बुधवार को छात्रों और वामपंथी संगठनों ने जोरदार प्रदर्शन किया। बापसा, भाकपा माले और आइसा से जुड़े छात्र परिवर्तन चौक पर जुटे और वहां से स्वास्थ्य भवन चौराहे तक पैदल मार्च निकाला। विश्वविद्यालय परिसर में धरना-प्रदर्शन पर रोक होने के कारण यह मार्च बाहर निकाला गया। प्रदर्शन में मुस्लिम समाज के लोग भी शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने बिना स्पष्ट आदेश सार्वजनिक स्थल को बंद कर दिया है। लाल बारादरी पर ताला लगाए जाने के विरोध में पहले भी दो दिन तक धरना दिया गया था, लेकिन कोई ठोस जवाब नहीं मिला।
डीएम ऑफिस कूच पर अड़े, पुलिस ने रोका
छात्रों ने परिवर्तन चौक से डीएम कार्यालय तक मार्च निकालने का ऐलान किया था, लेकिन भारी पुलिस बल ने उन्हें स्वास्थ्य भवन चौराहे पर रोक लिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक हुई। सिटी मजिस्ट्रेट ज्ञान चंद्र गुप्ता मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों से बातचीत की। छात्रों ने उन्हें अपना मांग पत्र सौंपा और आरोप लगाया कि लाल बारादरी को संघ प्रमुख मोहन भागवत के कार्यक्रम के बाद सील किया गया। उनका कहना था कि यदि कार्रवाई कानूनी है तो सीलिंग का आदेश सार्वजनिक किया जाए। पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की बात कही और आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी।
प्रशासन की रोक और छात्रों का आरोप
विश्वविद्यालय प्रशासन ने 25 फरवरी को नोटिस जारी कर परिसर में किसी भी प्रकार के धरना-प्रदर्शन पर रोक लगा दी थी। छात्रों का आरोप है कि प्रशासन ने बातचीत का आश्वासन दिया था, लेकिन समय बीतने के बाद भी ताला खोलने को लेकर कोई नोटिस जारी नहीं किया गया। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने नारेबाजी करते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि संस्थान को वैचारिक रूप से प्रभावित किया जा रहा है। अंततः स्वास्थ्य भवन चौराहे पर ही मार्च समाप्त हुआ। फिलहाल प्रशासन की ओर से कोई विस्तृत बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है।
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