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Shiv Vishwakarma |
Hindi Now Uttar Pradesh • 25 Nov 2025, 12:12 pm
अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के 673 दिन बाद राम मंदिर ने आज ऐतिहासिक क्षण देखा, जब पीएम नरेंद्र मोदी और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने मंदिर के शिखर पर धर्मध्वजा फहराई। अभिजीत मुहूर्त सुबह 11.50 बजे जैसे ही प्रधानमंत्री ने बटन दबाया। इस दौरान दो किलो की केसरिया ध्वजा 161 फीट ऊंचे शिखर पर लहराने लगी। इसके साथ ही राम मंदिर के संपूर्ण रूप से तैयार होने की घोषणा हो गई। ध्वज फहरते ही प्रधानमंत्री भावुक हो उठे और हाथ जोड़कर धर्मध्वजा को प्रणाम किया।
पीएम मोदी पहली बार रामदरबार पहुंचे, की पूजा अर्चना
ध्वजारोहण से पहले प्रधानमंत्री मोदी पहली बार मंदिर के फर्स्ट फ्लोर पर बने रामदरबार में पहुंचे, जहां उन्होंने मोहन भागवत के साथ पूजा और आरती की। रामलला के दर्शन किए। वे अपने साथ रामलला के लिए वस्त्र और चंवर भी लेकर आए थे। इसके बाद उन्होंने सप्त ऋषियों के मंदिर में दर्शन किए, भगवान शेषावतार लक्ष्मण की पूजा की और मंदिर परिसर में बने जलाशय का निरीक्षण भी किया।
पीएम मोदी ने किया डेढ़ किलोमीटर लंबा रोड शो
इससे पहले प्रधानमंत्री ने साकेत कॉलेज से रामजन्मभूमि तक लगभग डेढ़ किलोमीटर लंबा भव्य रोड शो किया। मार्ग में स्कूली बच्चों ने काफिले पर फूल बरसाए और कई स्थानों पर महिलाओं ने पारंपरिक तरीके से उनका स्वागत किया। पूरे शहर में इस आयोजन को भव्यता देने के लिए 1000 क्विंटल फूलों से सजावट की गई है।
कार्यक्रम में शामिल होने वाले थे कई बड़े सेलिब्रिटी
ध्वजारोहण समारोह में कई नामचीन हस्तियों के शामिल होने की चर्चा थी, जिसमें अमिताभ बच्चन जैसे बड़े स्टारों का भी नाम था, हालांकि अभी तक कोई सेलिब्रिटी मंदिर परिसर में नहीं पहुंचा है। शंकराचार्यों को छोड़कर देशभर के अनेक मठों और अखाड़ों के संत बड़ी संख्या में उपस्थित हैं। मंदिर परिसर को हाई सिक्योरिटी ज़ोन में बदला गया है। पांच-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है। एटीएस और एनएसजी कमांडो ने पूरे क्षेत्र को घेर रखा है, जबकि एसपीजी, सीआरपीएफ और पीएसी के जवान भी मुस्तैद हैं।
पहले की गई रामलला की आरती, फिर पहनाए गए परिधान
सुबह रामलला की विशेष आरती की गई। आज रामलला ने सोने और रेशम के धागों से निर्मित पीतांबर परिधान धारण किया। मंदिर पर लगी धर्मध्वजा को इस तरह तैयार किया गया है कि भयंकर तूफान में भी उसे क्षति नहीं पहुंचेगी और हवा के रुख बदलने पर वह बिना उलझे आसानी से पलट सकेगी। ध्वजदंड पर 21 किलो सोना मढ़ा गया है और यह ध्वजा लगभग 4 किलोमीटर दूर से भी दिखाई देती है।
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