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Shiv Vishwakarma |
Hindi Now Uttar Pradesh • 25 Nov 2025, 02:10 pm
राम मंदिर में ध्वजारोहण की ऐतिहासिक समारोह संपन्न हुआ। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विशाल जनसमूह को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि आज करोड़ों लोगों का वर्षों पुराना सपना साकार हुआ है। सदियों पुराने घाव पीढ़ियों से सबके दिलों में बसे थे, अब धीरे-धीरे भर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने आह्वान किया कि हम ऐसा समाज निर्मित करें, जहां न कोई गरीब हो और न कोई पीड़ित हो। उन्होंने कहा कि यह धर्मध्वजा युगों-युगों तक श्रीराम के आदर्शों और प्रेरणाओं को मानवता तक पहुंचाता रहेगा।
पीएम ने मंदिर निर्माण से जुड़े हर दानवीर, श्रमवीर, कारीगर, योजनाकार और वास्तुकार को नमन किया और कहा कि यह वही पवित्र नगरी है, जहां से प्रभु श्रीराम ने अपना जीवन पथ आरंभ किया था। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण के लिए समाज की सामूहिक शक्ति आवश्यक है। परिसर में सप्त मंदिरों का निर्माण, निषादराज का मंदिर, जटायु और गिलहरी की प्रतिमाएं यह संदेश देती हैं कि बड़ा संकल्प तभी पूरा होता है, जब छोटे से छोटा प्रयास भी सम्मान पाता है।
जिन्होंने अपने प्राण न्योछावर किए, आज उनकी आत्माएं तृप्त हो गईं
इस अवसर पर सर संघचालक मोहन भागवत ने कहा कि यह दिन हम सभी के लिए अत्यंत सार्थक है। जिन अनगिनत लोगों ने इस मंदिर आंदोलन में अपने प्राण तक न्योछावर किए, उनकी आत्माएं आज अवश्य तृप्त हुई होंगी। उन्होंने कहा कि राम राज्य का ध्वज, जो कभी अयोध्या में फहराया करता था, आज पुनः उसी गरिमा के साथ लहरा उठा है। उन्होंने समझाया कि इस भगवा ध्वज पर अंकित कोविदार वृक्ष रघुकुल की सत्ता, त्याग और लोककल्याण का प्रतीक है। यह वृक्ष सभी को छाया देता है और स्वयं धूप में खड़ा रहता है यही परंपरा रघुकुल का आदर्श रही है।
ध्वज पर बना सूर्य भगवान संकल्प और प्रकाश का प्रतीक
भागवत ने यह भी कहा कि ध्वज पर बना सूर्य भगवान संकल्प और प्रकाश का प्रतीक है। एक पहिए वाला चिह्न यह दर्शाता है कि कठिनाइयों के बावजूद यात्रा निरंतर आगे बढ़ती है। आज जो मंदिर खड़ा है, वह वैसा ही नहीं, बल्कि उससे भी अधिक भव्य और दिव्य है जैसा कभी कल्पना की गई थी।
मंदिर के शिखर पर लहराता केसरिया ध्वज नए भारत की ऊर्जा और आत्मविश्वास का प्रतीक
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि मंदिर के शिखर पर लहराता केसरिया ध्वज नए भारत की ऊर्जा और आत्मविश्वास का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि 500 वर्षों में समय और परिस्थितियां बदलीं, नेतृत्व बदला, लेकिन आस्था न कभी झुकी, न थमी। जब आंदोलन की कमान आरएसएस के हाथों में आई, तो एक ही नारा गूंजता रहा “रामलला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे।” आज वह संकल्प पूर्णता को प्राप्त हो चुका है।
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