बनारस में छात्र ने यूपी बोर्ड परीक्षा की कॉपी में लिखा- सर शादी है, पास कर दीजिए, वरना तिलक कम चढ़ेगा

Curated By: shivup | Hindi Now Uttar Pradesh • 24 Mar 2026, 12:39 pm
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यूपी बोर्ड की कॉपी जांच में छात्रों की भावुक अपीलें सामने आईं, किसी ने शादी तो किसी ने परिवार का हवाला देकर पास करने की गुहार लगाई, लेकिन शिक्षक केवल उत्तर के आधार पर ही नंबर दे रहे हैं।

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद) की इंटरमीडिएट कॉपियों के मूल्यांकन के दौरान इस बार अजीब और भावुक करने वाले मामले सामने आ रहे हैं। छात्र-छात्राएं उत्तर पुस्तिकाओं में पास कराने की गुहार लगा रहे हैं। किसी ने शादी का हवाला दिया, तो किसी ने पारिवारिक परेशानियों का जिक्र करते हुए परीक्षकों से मदद मांगी है। सोमवार को फिजिक्स की कॉपियां जांचते समय कई ऐसी लाइनें देखने को मिलीं, जिनमें छात्रों ने अपनी कमजोर तैयारी और निजी परिस्थितियों का जिक्र किया। हालांकि, परीक्षकों का कहना है कि मूल्यांकन पूरी तरह लिखे गए उत्तरों के आधार पर ही किया जाता है, भावनात्मक अपीलों का असर नंबरों पर नहीं पड़ता।


शादी और परिवार का हवाला देकर मांगी मदद

मूल्यांकन केंद्र पर कॉपी जांच रहे शिक्षक आशीष मिश्रा ने बताया कि कई छात्र-छात्राओं ने अपनी कॉपियों के आखिरी पन्ने पर भावुक संदेश लिखे हैं। एक छात्रा ने लिखा कि 13 मई को उसकी शादी है और अगर वह फेल हो गई तो रिश्ता टूट सकता है। वहीं, एक छात्र ने पिता की बीमारी का हवाला देते हुए बताया कि वह अस्पताल से सीधे परीक्षा देने आता था। कुछ छात्रों ने तो पैसे देने की बात भी लिखी, लेकिन सख्ती और CCTV के कारण ऐसा नहीं कर सके। इन अपीलों से साफ है कि कई छात्र परीक्षा के दबाव और निजी समस्याओं से जूझ रहे हैं।


सख्ती के चलते इस बार नहीं मिल रहे नोट

इस बार मूल्यांकन के दौरान कॉपियों में पैसे निकलने के मामले काफी कम हो गए हैं। इसकी वजह बोर्ड सचिव भगवती सिंह के सख्त निर्देश हैं। उन्होंने पहले ही आदेश दिया था कि यदि किसी कॉपी में पैसे मिलते हैं तो संबंधित कक्ष निरीक्षक पर भी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही ऐसी धनराशि को कोषागार में जमा कराना अनिवार्य किया गया है। इस सख्ती का असर साफ दिख रहा है और अब छात्र भावनात्मक संदेश लिखकर ही परीक्षकों को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं।


अब तक 32 लाख से ज्यादा कॉपियां जांची गईं

शिक्षक संजय मिश्रा का कहना है कि कॉपियों में लिखी भावुक लाइनों को पढ़ा जरूर जाता है, लेकिन नंबर सिर्फ उत्तर के आधार पर ही दिए जाते हैं। बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार 23 मार्च तक प्रदेशभर में 32 लाख से ज्यादा उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन हो चुका है। इसमें हाईस्कूल और इंटरमीडिएट दोनों की कॉपियां शामिल हैं। कुल मिलाकर इस बार भी मूल्यांकन प्रक्रिया सख्ती और पारदर्शिता के साथ जारी है।


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