1 करोड़ की रिश्वत के मामले में सस्पेंडेड IAS अधिकारी अभिषेक प्रकाश हुए बहाल, सीएम योगी ने एक साल पहले किया था निलंबित, कारोबारी ने की थी शिकायत

Curated By: shivup | Hindi Now Uttar Pradesh • 12 Mar 2026, 05:32 pm
news-banner

उत्तर प्रदेश सरकार ने सस्पेंडेड IAS अधिकारी अभिषेक प्रकाश को करीब एक साल बाद बहाल कर दिया है। उन पर सोलर प्रोजेक्ट की मंजूरी के बदले कमीशन मांगने का आरोप लगा था। शिकायतकर्ता के अदालत में बयान बदलने के बाद मामला खत्म हुआ और अब उनकी सेवा बहाल कर दी गई है।

उत्तर प्रदेश सरकार ने सस्पेंड किए गए IAS अधिकारी अभिषेक प्रकाश को करीब एक साल बाद बहाल कर दिया है। उन पर आरोप था कि उन्होंने अपने करीबी बाबू निकांत जैन के जरिए एक सोलर इंडस्ट्री प्रोजेक्ट की मंजूरी के बदले एक कारोबारी से करीब एक करोड़ रुपये का कमीशन मांगा था। आरोप है कि रकम न मिलने पर प्रोजेक्ट की फाइल रोक दी गई थी। इस मामले की शिकायत कारोबारी विश्वजीत दत्ता ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से की थी। इसके बाद सरकार ने मामले की जांच एसटीएफ को सौंप दी थी। जांच के दौरान बाबू निकांत जैन को गिरफ्तार किया गया था। उसने पूछताछ में स्वीकार किया था कि वह अभिषेक प्रकाश के कहने पर ही कमीशन की मांग कर रहा था। बाद में इसी मामले में अभिषेक प्रकाश को निलंबित कर दिया गया था।


कोर्ट में शिकायत से मुकरने के बाद बदला मामला

इस साल 10 फरवरी को मामले में नया मोड़ आया, जब कारोबारी विश्वजीत दत्ता ने लखनऊ हाईकोर्ट में अपनी पहले की शिकायत से पीछे हटते हुए कहा कि उन्होंने शिकायत गलतफहमी में दर्ज कराई थी। इसके बाद अदालत ने मामले को रद्द कर दिया। मामला खत्म होने के बाद से ही अभिषेक प्रकाश की बहाली की चर्चा तेज हो गई थी। अब सरकार ने उन्हें फिर से सेवा में बहाल कर दिया है। सूत्रों के अनुसार, प्रशासनिक स्तर पर उनके लिए जल्द ही नई जिम्मेदारी तय की जा सकती है।


पहले भी लग चुके हैं कई गंभीर आरोप

अभिषेक प्रकाश इससे पहले औद्योगिक विकास विभाग में सचिव और इन्वेस्ट यूपी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के पद पर तैनात थे। उनके कार्यकाल के दौरान कई विवाद भी सामने आए थे।

लखनऊ के भटगांव में डिफेंस कॉरिडोर के लिए अधिग्रहीत जमीन के मामले में भी उनकी भूमिका को लेकर सवाल उठे थे। आरोप था कि भूमि अधिग्रहण समिति के अध्यक्ष रहते हुए जमीन की दरें मनमाने तरीके से तय की गईं, जिससे करोड़ों रुपये के मुआवजे में अनियमितता हुई। इसके अलावा लखनऊ विकास प्राधिकरण में उपाध्यक्ष रहते हुए कुछ बिल्डरों को फायदा पहुंचाने और मनमाने तरीके से लाइसेंस जारी करने के आरोप भी लगाए गए थे। वहीं अलीगढ़, लखीमपुर खीरी और हमीरपुर में जिलाधिकारी रहते हुए भी जमीन खरीद-बिक्री, टेंडर प्रक्रिया और खनन से जुड़े मामलों में अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई थीं।


यह भी पढ़ें- मेरठ में फर्जी IAS गिरफ्तार, आधी रात को कर रहा था हंगामा, स्थानीय लोगों की सूचना पर पुलिस ने दबोचा

advertisement image