योगी सरकार में हो सकता है बड़ा बदलाव, मंत्री एके शर्मा से छिन सकता है ऊर्जा विभाग, मंत्रिमंडल विस्तार में दिख सकता है असर

Curated By: shivup | Hindi Now Uttar Pradesh • 08 May 2026, 02:06 pm
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यूपी सरकार ने जनता के भारी विरोध और चुनावी नुकसान की आशंका के बाद स्मार्ट प्रीपेड मीटर व्यवस्था वापस लेने का फैसला किया है। अब उपभोक्ताओं को फिर से सामान्य बिजली बिल मिलेगा।

उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड बिजली मीटर को लेकर सरकार को आखिरकार बड़ा यू-टर्न लेना पड़ा। लगातार बढ़ते जनविरोध, भाजपा नेताओं के नकारात्मक फीडबैक और चुनावी नुकसान की आशंका के बाद सरकार ने प्रीपेड सिस्टम को वापस लेने का फैसला किया। अब उपभोक्ताओं को फिर से हर महीने सामान्य बिजली बिल मिलेगा और बकाया राशि किस्तों में जमा करने की सुविधा भी दी जाएगी। राजनीतिक और संगठनात्मक सूत्रों का दावा है कि इस पूरे विवाद के बाद ऊर्जा मंत्री एके शर्मा का विभाग भी बदला जा सकता है। प्रदेश में करीब 3.58 करोड़ घरेलू बिजली उपभोक्ता हैं। फरवरी 2026 तक इनमें से 87 लाख घरों में स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके थे। इनमें अधिकांश स्मार्ट पोस्टपेड मीटर थे, जिन्हें विभाग ने उपभोक्ताओं की सहमति के बिना प्रीपेड सिस्टम में बदलना शुरू कर दिया। इसके बाद मार्च और अप्रैल में लाखों उपभोक्ताओं की बिजली निगेटिव बैलेंस दिखाकर काट दी गई। बताया जा रहा है कि एक साथ करीब 5 लाख घरों की बिजली सप्लाई बंद हुई, जिससे लोगों में भारी नाराजगी फैल गई। कई जगह रिचार्ज कराने के बाद भी बिजली चालू नहीं हुई। विभाग ने तकनीकी गड़बड़ी की बात कही, लेकिन तब तक मामला पूरे प्रदेश में फैल चुका था।


स्मार्ट मीटर के खिलाफ सड़क पर उतरी जनता

स्मार्ट मीटर को लेकर लोगों की शिकायतें लगातार बढ़ती गईं। सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो वायरल हुए, जिनमें बिना बिजली उपयोग के भी मीटर में खपत दर्ज होने का दावा किया गया। लोगों में यह धारणा बन गई कि स्मार्ट मीटर सामान्य मीटर से तेज चल रहे हैं और ज्यादा बिल बना रहे हैं। सबसे बड़ी समस्या यह रही कि बिजली विभाग के पास शिकायतों के समाधान का प्रभावी सिस्टम नहीं था। हेल्पलाइन 1912 पर की गई शिकायतें बिना निस्तारण के बंद होने लगीं। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब सोलर प्लांट लगाने वाले उपभोक्ताओं के नेट मीटर हटाकर स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए गए और सोलर बिजली समायोजन के बिना भारी-भरकम बिल भेजे जाने लगे। इसके बाद लखनऊ, आगरा, प्रयागराज, वाराणसी, बरेली, फिरोजाबाद और मथुरा समेत कई शहरों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। महिलाओं तक ने मीटर उखाड़कर बिजली विभाग कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन किए। इन घटनाओं के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए।


संघ और भाजपा नेताओं ने सरकार को दिया अलर्ट

सूत्रों के मुताबिक, शुरुआत में सरकार इस फैसले को वापस लेने के पक्ष में नहीं थी। अफसरों का तर्क था कि कुछ लोग भ्रम फैलाकर विरोध करवा रहे हैं। लेकिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा संगठन से लगातार नकारात्मक फीडबैक मिलने लगा। संघ पदाधिकारियों ने सरकार के साथ समन्वय बैठकों में साफ कहा कि यदि समय रहते फैसला नहीं बदला गया तो विधानसभा चुनाव में बड़ा नुकसान हो सकता है।

भाजपा विधायकों और स्थानीय नेताओं ने भी ऊर्जा मंत्री एके शर्मा को लेकर नाराजगी जताई। आगरा, अलीगढ़ और फिरोजाबाद जैसे जिलों से पार्टी नेतृत्व को स्पष्ट संदेश मिला कि स्मार्ट मीटर का मुद्दा चुनाव में भारी पड़ सकता है। इस बीच विपक्ष ने भी इसे मुद्दा बनाना शुरू कर दिया। समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने स्मार्ट मीटर की तुलना ईवीएम से करते हुए इसे बड़ा स्कैम बताया। वहीं आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने इन्हें ‘स्मार्ट चीटर’ करार दिया।


चुनाव नतीजों के बाद बदला सरकार का रुख

4 मई को पांच राज्यों के चुनाव परिणाम आने के बाद सरकार का रुख अचानक बदल गया। उसी दिन ऊर्जा मंत्री एके शर्मा शक्ति भवन पहुंचे और अधिकारियों के साथ बैठक कर प्रीपेड सिस्टम खत्म करने की घोषणा कर दी। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं की शिकायतों और तकनीकी दिक्कतों को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। साथ ही निर्देश दिए गए कि किसी भी हालत में एक महीने के भीतर बिजली कनेक्शन न काटे जाएं। गौरतलब है कि भारत सरकार की कंपनी ईईएसएल ने 2023 में यूपी में स्मार्ट मीटर लगाने का काम शुरू किया था। उस समय भी कई शिकायतें सामने आई थीं। केंद्र सरकार की जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में स्मार्ट मीटरिंग सिस्टम और बिलिंग व्यवस्था में कई गंभीर खामियां बताई थीं, लेकिन तीन साल बाद भी वे समस्याएं पूरी तरह दूर नहीं हो सकीं।


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