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Shiv Vishwakarma |
Hindi Now Uttar Pradesh • 05 Nov 2025, 10:51 am
बिहार में पहले चरण के चुनाव प्रचार के थमने के साथ ही मंगलवार को एक दिलचस्प नजारा देखने को मिला। यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पटना एयरपोर्ट पर आमने-सामने आ गए। इस दौरान दोनों नेताओं का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इस वीडियो में दोनों हंसते-मुस्कुराते हुए बातचीत करते दिखाई दे रहे हैं। कुछ मिनटों के लिए दोनों एक-दूसरे का हाथ भी पकड़े नजर आए। यह मुलाकात खास इसलिए मानी जा रही है, क्योंकि यूपी विधानसभा में हुई तीखी नोकझोंक के बाद यह दोनों नेताओं की पहली मुलाकात थी। दोनों नेता पटना से लखनऊ लौट रहे थे। इस वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर यूजर्स तरह-तरह के कमेंट कर रहे हैं। एक यूजर ने लिखा कि अखिलेश भैया एंड कंपनी, केशव जी के पीछे घूमने में अपना बड़प्पन समझते हैं। यूजर्स के इन मजाकिया कमेंट्स ने सोशल मीडिया में हलचल मचा दी है।
विधानसभा में अखिलेश और केशव की हुई थी तीखी बहस
अखिलेश यादव और केशव मौर्य के बीच राजनीतिक विरोध किसी से छिपा नहीं है। 25 मई 2025 को यूपी विधानसभा में दोनों के बीच जोरदार बहस हुई थी। अखिलेश ने उस समय कहा था कि जनता ने केशव मौर्य को हराकर उनकी गर्मी निकाल दी है। उन्होंने यह भी कहा कि अपने जिले की सड़क किसने बनवाई, यह भूल गए हैं। इस पर केशव मौर्य ने पलटवार किया था और कहा था कि आप 400 सीटों का दावा करते थे, लेकिन 100 भी नहीं जीत पाए। लगता है एक्सप्रेसवे सैफई बेचकर बनवाया गया है। इस बयान पर अखिलेश भड़क उठे और बोले क्या तुम अपने बाप के पैसे से सड़क बनवाते हो? इसके बाद सदन में हंगामा मच गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को हस्तक्षेप करना पड़ा और उन्होंने दोनों पक्षों को मर्यादा में रहने की सलाह दी।
अखिलेश के निशाने पर सबसे ज्यादा केशव मौर्य क्यों?
अखिलेश यादव और केशव मौर्य दोनों ही पिछड़े वर्ग से आते हैं और यही वजह है कि राजनीतिक रूप से वे एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी माने जाते हैं। केशव मौर्य अक्सर समाजवादी पार्टी को “समाप्तवादी पार्टी” कहते हैं, जबकि अखिलेश उन्हें “स्टूल मंत्री” कहकर तंज कसते हैं। हाल ही में केशव के अयोध्या दीपोत्सव में नहीं जाने पर अखिलेश ने टिप्पणी की थी, उन्होंने कहा था कि जिन्हें अखबार में जगह नहीं मिली, उनकी सरकार में क्या हैसियत है। अखिलेश की पीडीए (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) राजनीति में ‘पी’ यानी पिछड़ा वर्ग अहम भूमिका में है और केशव मौर्य उसी वर्ग से आने के कारण सपा की रणनीति में सबसे बड़ा चुनौती बनते हैं। यही कारण है कि सियासी मंच हो या सदन, दोनों के बीच तेज प्रतिस्पर्धा देखने को मिलती है।
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