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shivup |
Hindi Now Uttar Pradesh • 16 Mar 2026, 06:34 pm
अलीगढ़ से भाजपा सांसद सतीश गौतम अपने एक बयान को लेकर चर्चा में आ गए हैं। उन्होंने एक यूट्यूबर को दिए इंटरव्यू में कहा कि सरकार की कई योजनाओं का फायदा सबसे ज्यादा मुसलमान उठा रहे हैं। सांसद ने कहा, “मकान इनको, राशन इनको, सिलेंडर इनको... सब कुछ तो सरकार इन्हें दे रही है। AIIMS से लेकर जिला अस्पताल तक चले जाओ, सारी सरकारी व्यवस्थाओं का फायदा सबसे ज्यादा मुसलमान ही ले रहा। इसके बाद अब क्या हमारी छाती पर चढ़ेंगे?” सांसद का यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में आ गया है। उन्होंने शहर के नुमाइश मैदान में ईद की नमाज कराने की मांग और नमाजियों पर पुष्प वर्षा कराने की मांग पर भी नाराजगी जताई।
अजान के लाउडस्पीकर पर भी जताई आपत्ति
सांसद सतीश गौतम ने अजान के लाउडस्पीकर को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि सुबह 4 बजे से मस्जिदों से आवाज आने लगती है, जिससे लोगों को परेशानी होती है। उन्होंने कहा कि बच्चों की परीक्षाएं चल रही होती हैं और इस तरह की आवाजों से उन्हें दिक्कत होती है। सांसद ने यह भी कहा कि उन्हें रमजान के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा, “मैं नहीं जानता यह रमजान-फमजान क्या होता है।” सांसद ने यह भी आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी के शासनकाल में शहर में अतिक्रमण बढ़ा है और अब कुछ लोग नुमाइश मैदान में ईद की नमाज की मांग कर रहे हैं।
AIMIM ने ईद की नमाज के लिए मांगी थी अनुमति
दरअसल अलीगढ़ में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने जीटी रोड स्थित नुमाइश मैदान में ईद की नमाज कराने की अनुमति मांगी थी। पार्टी के जिलाध्यक्ष यामीन खान अब्बासी के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपा था। ज्ञापन में ईद के दिन नमाजियों पर हेलिकॉप्टर से पुष्प वर्षा कराने की अनुमति भी मांगी गई थी। संगठन का कहना था कि शहर की आबादी बढ़ने के कारण ईदगाहों में जगह कम पड़ जाती है, इसलिए नुमाइश मैदान को वैकल्पिक स्थान के रूप में उपलब्ध कराया जाए।
AIMIM जिलाध्यक्ष ने दिया जवाब
सांसद के बयान पर AIMIM के जिलाध्यक्ष यामीन खान अब्बासी ने पलटवार करते हुए कहा कि नुमाइश मैदान किसी की निजी संपत्ति नहीं है। उन्होंने कहा कि यह जमीन उनके पूर्वजों द्वारा नुमाइश के लिए दी गई थी और सांसद इसे दहेज में लेकर नहीं आए हैं। अब्बासी ने कहा कि जब नुमाइश मैदान में होली मिलन, दशहरा कार्यक्रम, राजनीतिक रैलियां और बाजार आयोजित हो सकते हैं, तो साल में एक बार ईद की नमाज से भी किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने प्रशासन से जनहित में निर्णय लेने की अपील भी की।
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