फर्जी आईडी से आयुष्मान कार्ड बनाने वाले गैंग का खुलासा, पुलिस ने सात को दबोचा

Curated By: Shiv Vishwakarma | Hindi Now Uttar Pradesh • 25 Dec 2025, 07:34 pm
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लखनऊ STF ने फर्जी आईडी से अपात्र लोगों के आयुष्मान कार्ड बनाने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। 7 आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है, जिन्होंने अब तक 2000 से ज्यादा फर्जी कार्ड बनवाकर सरकारी योजना का दुरुपयोग किया।

उत्तर प्रदेश में आयुष्मान भारत योजना में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। लखनऊ STF ने फर्जी पहचान के जरिए अपात्र लोगों के आयुष्मान कार्ड बनवाने वाले गिरोह के 7 सदस्यों को गिरफ्तार किया है। ये आरोपी लखनऊ, बाराबंकी, प्रतापगढ़, गाजीपुर और इटावा के रहने वाले हैं। STF के मुताबिक, यह गिरोह अब तक 2000 से अधिक अपात्र लोगों के आयुष्मान कार्ड बनवाकर उन्हें सरकारी स्वास्थ्य योजना का अनुचित लाभ दिला चुका है। इससे पहले इसी गिरोह के दो सदस्य 17 जून 2025 को प्रयागराज के नवाबगंज इलाके से गिरफ्तार किए गए थे, जिनके पास से 84 फर्जी आयुष्मान कार्ड बरामद हुए थे। उसी मामले में प्रयागराज में एफआईआर दर्ज की गई थी और जांच आगे बढ़ी तो पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ। गिरफ्तार आरोपियों में प्रतापगढ़ निवासी चंद्रभान वर्मा को इस गिरोह का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। इसके अलावा बाराबंकी, गाजीपुर, लखनऊ और इटावा के अन्य युवक भी इसमें शामिल पाए गए हैं। STF ने सभी को गोमतीनगर विस्तार इलाके से गिरफ्तार किया है और उनसे गहन पूछताछ जारी है।


OTP बाइपास कर जोड़े जाते थे अपात्र नाम

STF की जांच में सामने आया है कि गिरोह साइबर कैफे संचालकों और ISA (Implementation Support Agency) से जुड़े कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से काम कर रहा था। यह लोग पात्र परिवारों की फैमिली आईडी में तकनीकी तरीके से OTP बाइपास कर अपात्र लोगों के नाम जोड़ देते थे। इसके बाद ISA और स्टेट हेल्थ एजेंसी (SHA) स्तर पर सेटिंग कर आयुष्मान कार्ड को अप्रूव कराया जाता था। इस पूरी प्रक्रिया में सिस्टम की खामियों और अंदरूनी मिलीभगत का जमकर फायदा उठाया गया। STF अधिकारियों का कहना है कि बिना अंदरूनी सहयोग के इतने बड़े पैमाने पर फर्जी कार्ड बनना संभव नहीं था।


6 हजार रुपए में बनता था एक फर्जी कार्ड

पूछताछ में मास्टरमाइंड चंद्रभान वर्मा ने कबूल किया कि वह एक फर्जी आयुष्मान कार्ड के बदले करीब 6 हजार रुपए वसूलता था। इसमें फैमिली आईडी में नाम जोड़ने के लिए 2 हजार रुपए, ISA स्तर पर अप्रूवल के लिए 1000 से 1500 रुपए और SHA स्तर पर अप्रूवल के लिए 4500 से 5000 रुपए तक खर्च किए जाते थे। उसने यह भी बताया कि अब तक ISA और SHA से जुड़े कर्मचारियों को करीब 20 लाख रुपए से ज्यादा की रकम दी जा चुकी है।


अस्पताल के अंदर से भी मिलीभगत

जांच में यह भी सामने आया कि कल्याण सिंह कैंसर इंस्टीट्यूट, लखनऊ में कार्यरत एक आयुष्मान मित्र और कंप्यूटर ऑपरेटर फर्जी कार्डों में जिले के मिसमैच को ठीक करने में मदद करता था। इसके बाद इन्हीं फर्जी कार्डों के जरिए अलग-अलग अस्पतालों में मुफ्त इलाज दिखाकर अवैध कमाई की जाती थी। STF का कहना है कि पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच की जा रही है और इसमें शामिल अन्य लोगों की जल्द गिरफ्तारी की जाएगी।

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