कानपुर में किशोरी से गैंगरेप करने वाला कोई आम सिपाही नहीं, दरोगा निकला, पूरा मामला जान आप कहेंगे शर्मनाक!

Curated By: shivnowup | Hindi Now Uttar Pradesh • 09 Jan 2026, 10:41 am
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कानपुर गैंगरेप मामले में पुलिस की लापरवाही पर कोर्ट नाराज हो गया। नाबालिग पीड़िता के बावजूद पॉक्सो एक्ट न लगाने पर अदालत ने फटकार लगाई। देरी और चूक के चलते पुलिस अफसरों पर कार्रवाई की गई है।

कानपुर गैंगरेप मामले में पुलिस की गंभीर लापरवाही पर अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। 5 जनवरी की रात 14 साल की नाबालिग के साथ हुए कथित गैंगरेप के बाद 8 जनवरी को पीड़िता को बयान दर्ज कराने कोर्ट लाया गया, लेकिन यहां भी पुलिस की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई। पीड़िता करीब तीन घंटे तक कोर्ट के बाहर बैठी रही, क्योंकि जांच अधिकारी समय पर नहीं पहुंचे। जब जांच अधिकारी पेश हुए तो अदालत ने पाया कि नाबालिग होने के बावजूद मुकदमे में पॉक्सो एक्ट की धाराएं ही नहीं जोड़ी गई थीं। इस पर जज ने नाराजगी जताते हुए जांच अधिकारी को पहले पॉक्सो एक्ट में एफआईआर दर्ज कराने और फिर बयान के लिए पेश होने के निर्देश दिए। कोर्ट की सख्ती के चलते उस दिन पीड़िता के बयान दर्ज नहीं हो सके।


पॉक्सो न लगाने पर अदालत की फटकार
कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि जब पीड़िता की उम्र 14 साल है, तो पॉक्सो एक्ट न लगाना गंभीर चूक है। अदालत की नाराजगी के बाद पुलिस पीड़िता को बिना बयान दर्ज कराए वापस ले गई। इस दौरान पीड़िता लगातार यह कहती रही कि उसे घर जाना है। पीड़िता के भाई का आरोप है कि मुख्य आरोपी खुद पुलिस विभाग में दरोगा है, इसलिए जानबूझकर केस को हल्का रखने की कोशिश की गई। उन्होंने बताया कि तीन दिन से परिवार को थानों और अधिकारियों के चक्कर लगवाए जा रहे हैं, लेकिन न तो सही धाराएं जोड़ी गईं और न ही बयान दर्ज हो सके।


चौकी से भगाने और फरार होने का आरोप
पीड़िता के भाई ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि घटना की सूचना देने पर चौकी से उन्हें डांटकर भगा दिया गया। इसके बाद पुलिस कमिश्नर से शिकायत करने पर मामला दर्ज हुआ, वह भी अज्ञात में। परिवार का आरोप है कि आरोपी दरोगा को जानबूझकर फरार होने का मौका दिया गया। भाई ने यह भी कहा कि उन्हें धमकियां मिल रही हैं और 10 लाख रुपये लेकर समझौता करने का दबाव बनाया जा रहा है।


पुलिस अफसरों पर गिरी गाज, जांच तेज
मामले में सामने आई लापरवाहियों के बाद पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने कार्रवाई की है। डीसीपी वेस्ट दिनेश चंद्र त्रिपाठी को हटाया गया है और सचेंडी इंस्पेक्टर विक्रम सिंह को सस्पेंड कर दिया गया है। आरोपी दरोगा की तलाश के लिए चार टीमें गठित की गई हैं। पीड़िता को संवासिनी गृह भेज दिया गया है। एडीसीपी वेस्ट कपिल देव सिंह के मुताबिक, मेडिकल रिपोर्ट में रेप की आशंका जताई गई है और फोरेंसिक जांच जारी है। पुलिस का कहना है कि जांच निष्पक्ष होगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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