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shivnowup |
Hindi Now Uttar Pradesh • 21 Jan 2026, 02:14 pm
डिजिटल पेमेंट और UPI मार्केट की सबसे बड़ी कंपनी फोनपे (PhonePe) जल्द ही शेयर बाजार में उतरने की तैयारी में है। कंपनी को अपने इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) के लिए शेयर बाजार नियामक SEBI से मंजूरी मिल गई है। इस अप्रूवल के बाद अब फोनपे जल्द ही अपना अपडेटेड ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) फाइल करेगी। बाजार से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, फोनपे का यह IPO करीब 12,000 करोड़ रुपये का हो सकता है, जिससे यह डिजिटल पेमेंट सेक्टर का दूसरा सबसे बड़ा IPO बन जाएगा। इससे पहले साल 2021 में पेटीएम ने 18,000 करोड़ रुपये का IPO लॉन्च किया था।
IPO पूरी तरह OFS के जरिए आएगा
फोनपे का यह IPO पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए लाया जाएगा। इसका मतलब है कि कंपनी कोई नए शेयर जारी नहीं करेगी, बल्कि इसके मौजूदा निवेशक अपनी हिस्सेदारी बाजार में बेचेंगे। जानकारी के अनुसार, इस IPO के जरिए वॉलमार्ट, टाइगर ग्लोबल और माइक्रोसॉफ्ट जैसे बड़े निवेशक मिलकर करीब 10 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच सकते हैं। फिलहाल फोनपे में वॉलमार्ट की हिस्सेदारी 73 प्रतिशत से ज्यादा है। कंपनी की कुल वैल्यूएशन करीब 15 बिलियन डॉलर, यानी लगभग 1.33 लाख करोड़ रुपये आंकी गई है। IPO के लिए फोनपे ने कोटक महिंद्रा कैपिटल, सिटी बैंक, मॉर्गन स्टेनली और जेपी मॉर्गन जैसे दिग्गज निवेश बैंकों को अपना सलाहकार नियुक्त किया है।
UPI मार्केट में फोनपे का दबदबा कायम
फोनपे की सबसे बड़ी ताकत UPI मार्केट में उसका मजबूत दबदबा है। देश के कुल डिजिटल पेमेंट ट्रांजैक्शन में फोनपे की हिस्सेदारी करीब 45 प्रतिशत है, जबकि गूगल पे 35 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ दूसरे स्थान पर है। फोनपे हर महीने करीब 1000 करोड़ से ज्यादा ट्रांजैक्शन प्रोसेस करता है, जिनकी कुल वैल्यू 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक बताई जाती है। कंपनी के पास इस समय 53 करोड़ से ज्यादा रजिस्टर्ड यूजर्स हैं, जो इसे भारत की सबसे बड़ी डिजिटल पेमेंट कंपनियों में शामिल करता है।
लिस्टिंग से पहले बदला गया कंपनी का ढांचा
IPO की तैयारी के तहत फोनपे ने 16 अप्रैल को खुद को प्राइवेट लिमिटेड से पब्लिक लिमिटेड कंपनी में बदल लिया था। यह प्रक्रिया भारतीय शेयर बाजार में लिस्टिंग के लिए जरूरी मानी जाती है। फोनपे ने फरवरी में IPO की प्लानिंग शुरू की थी। इससे पहले दिसंबर 2022 में कंपनी ने अपना मुख्यालय सिंगापुर से भारत शिफ्ट किया था। इसके साथ ही फोनपे ने अपने नॉन-पेमेंट बिजनेस को अलग-अलग सब्सिडियरी कंपनियों में बांट दिया, ताकि मुख्य पेमेंट कारोबार पर फोकस और मजबूत किया जा सके।
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