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shivup |
Hindi Now Uttar Pradesh • 04 Apr 2026, 11:32 am
कानपुर के चर्चित किडनी कांड में हर दिन नए खुलासे हो रहे हैं। अब जांच में सामने आया है कि जिस शख्स को यूरोलॉजिस्ट डॉक्टर बताया जा रहा था, वह असल में ओटी टेक्नीशियन निकला। पुलिस दिल्ली के उत्तम नगर निवासी मुदस्सर अली सिद्दीकी की तलाश कर रही है, जो इस पूरे मामले में मुख्य भूमिका में बताया जा रहा है।
फर्जी डॉक्टर बनकर कर रहा था किडनी ट्रांसप्लांट
पुलिस जांच के मुताबिक, आरोपी मुदस्सर अली सिद्दीकी ने खुद को डॉक्टर बताकर किडनी ट्रांसप्लांट जैसे गंभीर ऑपरेशन को अंजाम दिया। आरोप है कि उसने MBA स्टूडेंट आयुष की किडनी निकालकर एक महिला मरीज में ट्रांसप्लांट की थी। हैरान करने वाली बात यह है कि वह न तो रजिस्टर्ड डॉक्टर है और न ही यूरोलॉजिस्ट, बल्कि एक साधारण ओटी टेक्नीशियन है। 2 अप्रैल को गिरफ्तार अन्य ओटी टेक्नीशियनों से पूछताछ के बाद पुलिस टीम दिल्ली पहुंची, लेकिन आरोपी वहां से फरार मिला। परिवार से पूछताछ में भी यही पुष्टि हुई कि वह डॉक्टर नहीं है।
फ्लाइट से अलग-अलग राज्यों में करता था ऑपरेशन
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी मुदस्सर अली सिद्दीकी फ्लाइट के जरिए अलग-अलग शहरों में जाकर अवैध किडनी ट्रांसप्लांट करता था। डीसीपी वेस्ट एसएम कासिम आबिदी के अनुसार, गिरफ्तार टेक्नीशियन कुलदीप सिंह राघव और राजेश कुमार ने बताया कि आरोपी दिल्ली से कानपुर फ्लाइट से आया था और ऑपरेशन को अंजाम देकर वापस चला गया। इसके बाद डोनर और रिसीवर को अलग-अलग अस्पतालों में शिफ्ट कर दिया जाता था, ताकि किसी को शक न हो। इस पूरे नेटवर्क का तरीका बेहद संगठित और सुनियोजित बताया जा रहा है।
अस्पताल मालिक और डॉक्टर भी फरार, जांच तेज
मामले में अब तक 8 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, लेकिन कई बड़े नाम अभी भी फरार हैं। मेडिलाइफ हॉस्पिटल के तीनों पार्टनर डॉक्टर और मेरठ के कुछ अन्य डॉक्टर भी जांच के दायरे में हैं। पुलिस के मुताबिक, ये लोग डोनर और मरीज की व्यवस्था करते थे और पूरे नेटवर्क को चलाने में शामिल थे। किडनी कांड का खुलासा होने के बाद से संबंधित अस्पताल बंद हैं और कई आरोपी अपने घरों से गायब हैं। पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है और दावा कर रही है कि जल्द ही सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
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