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shivup |
Hindi Now Uttar Pradesh • 02 Mar 2026, 12:30 pm
राजधानी लखनऊ में बैंक मित्र के नाम पर हुए बड़े फर्जीवाड़े ने कई परिवारों की जमा-पूंजी डुबो दी। पारा इलाके में शकुंतला विश्वविद्यालय कैंपस स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा शाखा से जुड़े मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी शिवा राव के बाद उसकी मां कारा निर्मला, पत्नी भाग्यवती और नौकर विकास कुमार को भी गिरफ्तार कर लिया है। जांच में तीनों के खातों में करीब 12 करोड़ रुपये के ट्रांजेक्शन सामने आए हैं। पुलिस का कहना है कि ठगी की रकम से आलीशान घर बनाया गया और नौकर के लिए कार तक खरीदी गई। कई पीड़ितों के अनुसार, उनकी एफडी की राशि मैच्योरिटी पर न तो लौटी और न ही खातों में दिखाई दी, जिससे बेटियों की शादी तक टालनी पड़ी।
लोगों को झांसे में लेकर जमा कराए पैसे, मैच्योरिटी पर खुला खेल
कर्नाटक निवासी शिवा राव 2015 से बैंक मित्र के रूप में काम कर रहा था। वह ग्राहकों को समझाता कि बैंक की लाइन से बचने के लिए रकम सीधे उसके पास जमा कर दें, वह एफडी और अन्य बचत योजनाएं करा देगा। कई लोगों ने उस पर भरोसा कर लाखों रुपये सौंप दिए। लेकिन जब मैच्योरिटी की तारीख आई तो न एफडी का पैसा मिला और न खातों में जमा राशि दिखी। आरटीजीएस से ट्रांसफर हुई रकम भी गायब पाई गई। पीड़ितों का आरोप है कि उन्होंने न तो नकद सीधे आरोपी को दिया और न ही शाखा में औपचारिक जमा कराया, फिर भी पैसा लापता हो गया। इसके बाद शाखा में हंगामा हुआ और शिकायतों की बाढ़ आ गई।
परिवार और नौकर के खातों में 12 करोड़ की हलचल
पुलिस ने फरवरी के पहले सप्ताह में शिवा राव को और उसके कथित सहयोगी पूर्व सुरक्षा गार्ड दीपक को गिरफ्तार किया था। करीब डेढ़ महीने बाद 1 मार्च को मां, पत्नी और नौकर की गिरफ्तारी हुई। जांच में पता चला कि करीब डेढ़ करोड़ रुपये नौकर के खाते में ट्रांसफर किए गए। आरोप है कि ठगी की रकम से कार, गहने और अन्य संपत्तियां खरीदी गईं। पुलिस ने करीब ढाई लाख रुपये के जेवर, एक कार, चांदी के सिक्के, तीन मोबाइल, एक लैपटॉप, प्रिंटर और 47 हजार रुपये नकद बरामद किए हैं। इसी प्रिंटर से कथित तौर पर एफडी की फर्जी रसीदें तैयार की जाती थीं।
आग और मिलीभगत की जांच, अंदरूनी भूमिका पर शक
25 नवंबर 2025 को इसी शाखा में संदिग्ध परिस्थितियों में भीषण आग लगी थी, जिसमें कई दस्तावेज जल गए। पीड़ितों ने आरोप लगाया कि सबूत मिटाने के लिए आग लगाई गई। पुलिस का कहना है कि इतनी बड़ी रकम का फर्जीवाड़ा अकेले संभव नहीं, इसलिए कुछ बैंक कर्मियों की भूमिका की भी जांच हो रही है। पूरे नेटवर्क की परतें खोली जा रही हैं और आगे और गिरफ्तारियां संभव हैं।
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