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shivnowup |
Hindi Now Uttar Pradesh • 22 Jan 2026, 12:25 pm
वाराणसी में साइबर ठगों ने डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर एक रिटायर्ड रेलकर्मी से 23 लाख रुपये की ठगी कर ली। मामले में पीड़ित के डॉक्टर बेटे ने पहले साइबर क्राइम थाने और बाद में सिगरा थाने में एफआईआर दर्ज कराई है। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर साइबर एक्सपर्ट्स की मदद से जांच शुरू कर दी है। यह घटना 25 दिसंबर 2025 की बताई जा रही है, जब जालसाजों ने मनी लॉन्ड्रिंग के नाम पर बुजुर्ग को डराकर रकम ट्रांसफर करवा ली।
डिजिटल अरेस्ट और मनी लॉन्ड्रिंग का झांसा
डॉक्टर चंदन किशोर ने पुलिस को बताया कि उनके पिता रघुनंदन प्रसाद रेलवे से सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं। 25 दिसंबर 2025 को उनके पिता के मोबाइल पर एक व्हाट्सऐप कॉल आई। कॉल करने वाले ने दावा किया कि उनके आधार कार्ड से जुड़े एक मोबाइल नंबर का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग में हुआ है और उनके खिलाफ मुंबई में एफआईआर दर्ज है। ठगों ने कहा कि उन्हें मुंबई आकर पुलिस से पूछताछ करनी होगी और जल्द ही एक अधिकारी उनसे बात करेगा। कुछ ही देर में पुलिस के लोगो लगे नंबर से वीडियो कॉल आई, जिसमें सामने वाले व्यक्ति ने खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताया। उसने बुजुर्ग को जेल और भारी जुर्माने का डर दिखाया और किसी से भी इस बारे में बात न करने की सख्त हिदायत दी।
24 घंटे रखा डिजिटल अरेस्ट, RTGS से ट्रांसफर कराए पैसे
डॉक्टर चंदन किशोर के अनुसार, ठगों ने उनके पिता को मानसिक दबाव में रखते हुए करीब 24 घंटे तक डिजिटल अरेस्ट जैसी स्थिति में रखा। जब रघुनंदन प्रसाद ने कहा कि वह मुंबई नहीं आ सकते, तो ठगों ने जांच पूरी होने तक बैंक खाते की पूरी रकम एक अन्य खाते में ट्रांसफर करने को कहा। जालसाजों के झांसे में आकर रघुनंदन प्रसाद ने 26 दिसंबर को RTGS के जरिए गुवाहाटी स्थित एक बैंक खाते में 23 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। ठग लगातार वीडियो कॉल और फोन के जरिए निगरानी करते रहे, ताकि वह किसी से संपर्क न कर सकें।
FIR दर्ज, साइबर एक्सपर्ट्स की मदद से जांच
जब इस ठगी की जानकारी डॉक्टर चंदन किशोर को हुई, तो उन्होंने तुरंत ऑनलाइन साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। समाधान न मिलने पर सिगरा थाने में लिखित तहरीर दी गई। सिगरा थाना प्रभारी संजय मिश्रा ने बताया कि तहरीर के आधार पर बीएनएस की धारा 316(2) और 318(4) के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस साइबर एक्सपर्ट्स की मदद से बैंक खातों, कॉल डिटेल्स और डिजिटल ट्रेल की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही जालसाजों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा। यह मामला एक बार फिर डिजिटल अरेस्ट के नाम पर हो रही साइबर ठगी को उजागर करता है और लोगों को सतर्क रहने की जरूरत बताता है।
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