Curated By:
shivup |
Hindi Now Uttar Pradesh • 19 Feb 2026, 05:17 pm
वाराणसी में गुरुवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि दोनों डिप्टी सीएम—ब्रजेश पाठक और केशव प्रसाद मौर्य—भाजपा को हो रही क्षति को संभालने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन मुख्यमंत्री हठ पर अड़े हैं। उन्होंने ‘कालनेमि’ वाले बयान पर सवाल उठाते हुए पूछा कि आखिर इसका स्पष्टिकरण क्यों नहीं दिया गया। उन्होंने संत समाज को 10 दिन का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि साफ बताएं वे किसके साथ खड़े हैं।
विरक्त संत और मुख्यमंत्री पद पर उठाए सवाल
अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि अगर कोई विरक्त होकर धर्म की शपथ लेता है, तो वह दूसरी शपथ कैसे ले सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने विरक्त की शपथ के बाद भी मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर वेतनभोगी पद स्वीकार किया। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक द्वारा 101 बटुकों की पूजा करने पर उन्होंने कहा कि यह उनकी व्यक्तिगत भावना हो सकती है, लेकिन इससे मूल प्रश्न खत्म नहीं होता। उन्होंने पूछा कि क्या गेरुआ वस्त्र धारण करने वाला व्यक्ति मांसाहारी हो सकता है और क्या कोई विरक्त संत वेतनभोगी हो सकता है।
11 मार्च को लखनऊ में संत समाज की बैठक का आह्वान
शंकराचार्य ने कहा कि 11 मार्च को लखनऊ में संत, महंत और विद्वान एकत्र होकर अपनी बात रखेंगे। उन्होंने गोमाता की सुरक्षा को लेकर सरकार की नीतियों पर भी सवाल उठाए और कहा कि केवल फिल्म को टैक्स फ्री करना या डीएम को निर्देश भेजना पर्याप्त नहीं है। यह विवाद मौनी अमावस्या के दिन प्रयागराज माघ मेले में पालकी रोके जाने की घटना के बाद और बढ़ गया था। मुख्यमंत्री ने विधानसभा में कहा था कि कानून सबके लिए समान है और कोई भी कानून से ऊपर नहीं है। फिलहाल इस बयानबाजी के बाद प्रदेश की सियासत में हलचल तेज हो गई है।
यह भी पढ़ें- अविमुक्तेश्वरानंद की बढ़ी मुश्किलें, प्रयागराज में एक और परिवाद दाखिल, अब इस मामले में फंसे बाबा