Curated By:
Shiv Vishwakarma |
Hindi Now Uttar Pradesh • 16 Dec 2025, 01:40 pm
मथुरा के यमुना एक्सप्रेसवे पर हुए भीषण सड़क हादसे ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं। हादसे के दौरान एक मां ने ममता की ऐसी मिसाल पेश की, जिसे सुनकर हर किसी की आंखें नम हो गईं। 42 वर्षीय पार्वती ने अपने दोनों बच्चों को जलती बस से बाहर फेंक दिया। उसने अपने बच्चों की जान तो बचा ली, लेकिन खुद उस आग के दरिया से बाहर नहीं निकल सकी और उसकी मौत हो गई। आज उसके दोनों बच्चे जिंदा हैं, मगर मां की गोद हमेशा के लिए सूनी हो गई।
हमीरपुर के राठ की रहने वाली पार्वती अपने बच्चों प्राची और शनि के साथ नोएडा से पति गोविंद के पास लौट रही थी। सफर सामान्य चल रहा था, किसी को अंदेशा नहीं था कि कुछ ही पलों में जिंदगी मौत में बदल जाएगी। अचानक बस की टक्कर हुई और देखते ही देखते उसमें आग लग गई। चारों ओर चीख-पुकार मच गई। धुएं और लपटों के बीच पार्वती ने मां होने का फर्ज निभाया। उसने बस का शीशा तोड़ा और किसी तरह अपने दोनों बच्चों को बाहर निकाल दिया। बच्चों को सुरक्षित देखकर उन्हें शायद पल भर का सुकून मिला, लेकिन उसी दौरान कांच का टुकड़ा उनके गले में फंस गया। आग और धुएं के बीच वे बस से बाहर नहीं निकल सकीं।
हादसे की खबर मिलते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। पार्वती के देवर गुलज़ारी हमीरपुर से मथुरा पहुंचे और अस्पताल-दर-अस्पताल भटकते रहे। जिला अस्पताल, वृंदावन का अस्पताल, हर जगह तलाश की, लेकिन पार्वती कहीं नहीं मिली। अब वे पोस्टमार्टम हाउस के चक्कर काट रहे हैं, इस उम्मीद में कि शायद किसी तरह पार्वती की खबर मिल जाए। पुलिस और प्रशासन परिवार को ढांढस बंधा रहे हैं, लेकिन यह दिलासा उस खालीपन को नहीं भर सकता। पार्वती के दोनों बच्चे मां को पुकार-पुकारकर रो रहे हैं, और परिजनों की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे। यमुना एक्सप्रेसवे पर हुआ यह हादसा एक परिवार के लिए सब कुछ उजाड़ गया, जहां एक मां अपनी जान देकर भी अपने बच्चों की दुनिया बचा गई। इस हादसे में अब तक 13 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं 60 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं।
यह भी पढ़ें- हादसों का मंगलवार, कोहरे से विजबिलिटी हुई जीरो, 10 वाहन टकराए, सड़क पर बिछ गईं लाशें