जिस मां ने दो बच्चों को बचाया, उसके अवशेष तक नहीं मिले, यमुना एक्सप्रेस-वे हादसे में हुई थी 19 की मौत

Curated By: Shiv Vishwakarma | Hindi Now Uttar Pradesh • 03 Jan 2026, 11:19 am
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यमुना एक्सप्रेस-वे पर बलदेव में हुए भीषण हादसे में 19 मृतकों की पहचान हो चुकी है, लेकिन महिला पार्वती और बस कंडक्टर गोलू की मौत अब भी रहस्य बनी हुई है। डीएनए जांच के बाद प्रशासन ने विशेष कमेटी गठित की है।

यमुना एक्सप्रेस-वे पर बलदेव थाना क्षेत्र में हुए भीषण सड़क हादसे को एक महीना बीतने के बाद भी दो मौतों की गुत्थी नहीं सुलझ पाई है। इस दर्दनाक दुर्घटना में 8 बसों में सवार कुल 19 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें से 17 मृतकों की पहचान डीएनए जांच के जरिए हो चुकी है। हालांकि बस में सवार महिला पार्वती और एक बस कंडक्टर गोलू के अवशेष अब तक नहीं मिल सके हैं। डीएनए जांच के बावजूद दोनों के नमूनों का मिलान नहीं हो पाया, जिससे उनके परिजन गहरे सदमे और असमंजस में हैं। 16 दिसंबर की सुबह माइल स्टोन 127 पर घने कोहरे के बीच पहले तीन कारों की आपस में टक्कर हुई थी। इसके बाद पीछे से आ रही सात डबल डेकर बसें और आंबेडकर नगर डिपो की एक रोडवेज बस एक-दूसरे से भिड़ गईं। टक्कर इतनी भीषण थी कि कई वाहनों में आग लग गई। इस हादसे में एक कार सवार समेत 19 लोगों की जलकर मौत हो गई थी, जबकि करीब 100 यात्री घायल हुए थे। अधिकांश शव बुरी तरह जल चुके थे, जिससे पहचान कर पाना बेहद मुश्किल हो गया था।


डीएनए जांच के बाद भी नहीं सुलझी दो मौतों की गुत्थी
हादसे के बाद पुलिस ने मौके से जले हुए शवों और अवशेषों को एकत्र कर लापता यात्रियों के परिजनों के डीएनए सैंपल लिए थे। इन नमूनों की जांच आगरा और लखनऊ की फोरेंसिक लैब में कराई गई। जांच के बाद 18 अवशेषों की पहचान संभव हो सकी, लेकिन पार्वती और कंडक्टर गोलू का डीएनए किसी भी नमूने से मेल नहीं खा सका। इससे यह आशंका गहराने लगी कि हादसे के दौरान आग और टक्कर की भयावहता में उनके अवशेष पूरी तरह नष्ट हो गए हों। दोनों परिवार लगातार पुलिस और प्रशासन के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अभी तक उन्हें कोई ठोस जवाब नहीं मिल सका है।


हादसे में दिखाई थी इंसानियत, फिर भी रह गई अनसुलझी कहानी
जानकारी के अनुसार, राठ हमीरपुर निवासी पार्वती बस में अपने दो बच्चों के साथ सफर कर रही थीं। हादसे के वक्त उन्होंने साहस दिखाते हुए दोनों बच्चों को बस से बाहर धकेल दिया, जिससे उनकी जान बच गई, लेकिन खुद आग की चपेट में आ गईं। इसी तरह बाड़ी, धौलपुर निवासी गोलू बस का कंडक्टर था, जो हादसे के समय बस के बोनट पर सो रहा था। टक्कर और आग के बाद उसका भी कोई सुराग नहीं मिल सका। दोनों ही मामलों में न तो शव मिले और न ही पहचान योग्य अवशेष, जिससे मामला और उलझ गया।


जांच के लिए गठित हुई पांच सदस्यीय कमेटी
पुलिस जांच के बाद अब प्रशासन ने दोनों मौतों की परिस्थितियों की गहराई से जांच के लिए पांच सदस्यीय कमेटी गठित की है। इस समिति में मजिस्ट्रेट आदेश कुमार, ज्येष्ठ अभियोजन अधिकारी, सीओ महावन संजीव कुमार राय और एआरटीओ राजेश राजपूत को शामिल किया गया है। समिति साक्ष्य संकलन कर यह पता लगाएगी कि पार्वती और गोलू की मौत किन हालात में हुई और उनके अवशेष क्यों नहीं मिल सके। एसपी ग्रामीण सुरेशचंद्र रावत ने बताया कि दोनों परिवारों से लगातार संपर्क में रहकर हर पहलू की जांच की जा रही है।


फोरेंसिक वैज्ञानिकों को मिलेगा सम्मान
इस भीषण बस हादसे में मृतकों की समयबद्ध डीएनए पहचान कर पुलिस को सहयोग देने वाले आगरा की फोरेंसिक लैब के वैज्ञानिकों को सम्मानित किया जाएगा। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, वैज्ञानिकों ने बेहद जटिल जांच को कम समय में पूरा कर अहम भूमिका निभाई है।


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