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Shiv Vishwakarma |
Hindi Now Uttar Pradesh • 30 Dec 2025, 02:40 pm
योगी सरकार के संभावित मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि अगले महीने कैबिनेट का विस्तार हो सकता है, ऐसे में मंत्री पद पाने वालों के नामों पर अटकलें लगने लगी हैं। खास तौर पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश से कई विधायकों के नाम चर्चा में हैं। पार्टी के अंदरखाने से लेकर सत्ता के गलियारों तक गुणा-भाग शुरू हो चुका है। कुछ विधायकों ने दिल्ली और लखनऊ स्तर पर अपनी पैरवी भी तेज कर दी है। यह कैबिनेट विस्तार केवल सरकार का पुनर्गठन नहीं, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनाव की रणनीति का भी संकेत माना जा रहा है।
2027 की तैयारी का संदेश देगा मंत्रिमंडल विस्तार
भाजपा सूत्रों की मानें तो मंत्रिमंडल विस्तार में जातीय और क्षेत्रीय संतुलन का विशेष ध्यान रखा जाएगा। पश्चिमी यूपी, खासकर मुरादाबाद मंडल से एक नए चेहरे को कैबिनेट में जगह मिलना लगभग तय माना जा रहा है। वर्तमान में चंदौसी से विधायक गुलाब देवी माध्यमिक शिक्षा मंत्री हैं, जबकि रामपुर से विधायक बल्देव औलख कृषि राज्य मंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। पार्टी यह संदेश देना चाहती है कि आगामी चुनाव से पहले हर बड़े सामाजिक वर्ग और क्षेत्र को प्रतिनिधित्व मिले। इसी वजह से इस बार बदलाव को सामान्य विस्तार से कहीं ज्यादा अहम माना जा रहा है।
भूपेंद्र चौधरी की वापसी लगभग तय
भाजपा के बड़े जाट चेहरे भूपेंद्र चौधरी का नाम सबसे आगे चल रहा है। हाल ही में उनके स्थान पर पंकज चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है, लेकिन संगठन में भूपेंद्र चौधरी का कद अभी भी मजबूत माना जाता है। पहले वे पंचायतीराज मंत्री रह चुके हैं और मंत्री रहते ही उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था। जाट बेल्ट में पार्टी का संदेश मजबूत करने के लिए उन्हें दोबारा कैबिनेट मंत्री बनाए जाने की संभावना जताई जा रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पार्टी उन्हें सम्मानजनक जिम्मेदारी देकर पश्चिमी यूपी में संतुलन साध सकती है।
आकाश सक्सेना और रामवीर सिंह के नाम भी चर्चा में
रामपुर में सपा नेता आजम खां के गढ़ में भाजपा का परचम लहराने वाले आकाश सक्सेना का नाम भी जोर पकड़ रहा है। पार्टी के भीतर तर्क दिया जा रहा है कि इस जीत को सम्मान मिलना चाहिए। वहीं मुरादाबाद की कुंदरकी सीट से उपचुनाव में रिकॉर्ड मतों से जीत दर्ज करने वाले ठाकुर रामवीर सिंह भी मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं। मुख्यमंत्री और कई बड़े नेता अपने भाषणों में उनकी जीत का उदाहरण दे चुके हैं। ऐसे में इन दोनों में से किसी एक का मंत्री बनना भी संभव माना जा रहा है।
गुजरात मॉडल की चर्चा से बढ़ी बेचैनी
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी है कि क्या गुजरात की तर्ज पर यूपी में भी बड़ा फेरबदल होगा। इस अटकल ने कई मौजूदा मंत्रियों की बेचैनी बढ़ा दी है, जबकि कई विधायकों की उम्मीदों को पंख लग गए हैं। नए साल के साथ ही भाजपा मिशन-2027 की तैयारियों को और धार देने के मूड में है। संगठन के बाद अब सरकार में बदलाव की बारी मानी जा रही है। यही वजह है कि मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर प्रदेश की राजनीति में सरगर्मी अपने चरम पर है।
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