यूपी में दुष्कर्म के दोषी को मौत की सजा, जज बोले- मरते दम तक फंदे पर लटकाओ

Curated By: shivnowup | Hindi Now Uttar Pradesh • 07 Jan 2026, 11:44 am
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बांदा पॉक्सो कोर्ट ने छह साल की बच्ची से दुष्कर्म और हैवानियत के दोषी अमित रैकवार को मौत की सजा सुनाई। अदालत ने मामले को रेयरेस्ट ऑफ रेयर मानते हुए कड़ा फैसला दिया। 56 दिन में सुनवाई पूरी कर न्याय दिलाया गया।

बांदा जिला सत्र विशेष न्यायालय (पॉक्सो) ने एक जघन्य अपराध के मामले में 24 वर्षीय अमित रैकवार को मौत की सजा सुनाई है। अदालत ने साफ कहा कि ऐसे अपराधी समाज में रहने के लायक नहीं हैं। मंगलवार सुबह विशेष न्यायाधीश प्रदीप कुमार मिश्रा ने 46 पन्नों का विस्तृत फैसला सुनाते हुए दोषी को “मरते दम तक फंदे से लटकाए जाने” का आदेश दिया। फैसला सुनाने के बाद न्यायाधीश ने कलम की निब तोड़ दी, जो इस बात का संकेत है कि अदालत ने मामले को अत्यंत गंभीर और दुर्लभतम श्रेणी का माना। यह सनसनीखेज घटना 25 जुलाई 2025 को कालिंजर थाना क्षेत्र के एक गांव में हुई थी। स्कूल से लौट रही छह साल की बच्ची को आरोपी ने गुटखा मंगाने के बहाने रोका और फिर अपने घर ले जाकर उसके साथ हैवानियत की सारी हदें पार कर दीं। घटना के बाद पूरे इलाके में आक्रोश फैल गया था और पुलिस पर त्वरित कार्रवाई का दबाव बना।


मुठभेड़ में गिरफ्तारी, मजबूत साक्ष्य बने आधार
वारदात के कुछ ही घंटों बाद पुलिस ने आरोपी अमित रैकवार को मुठभेड़ के दौरान गिरफ्तार कर लिया था। मेडिकल जांच में बच्ची के शरीर पर गंभीर चोटों के निशान, दांतों से काटने के सबूत और अन्य भयावह तथ्य सामने आए। पुलिस ने तीन दिन के भीतर आरोपी को जेल भेज दिया और 7 अक्टूबर 2025 को न्यायालय में चार्जशीट दाखिल की। चार्जशीट में पॉक्सो एक्ट की धारा 6 और भारतीय नवीन दंड संहिता (बीएनएस) की कई गंभीर धाराएं लगाई गईं। मुकदमे के दौरान फॉरेंसिक रिपोर्ट, डीएनए जांच और मेडिकल साक्ष्य अभियोजन पक्ष के लिए बेहद अहम साबित हुए। अदालत ने माना कि यह कोई सामान्य अपराध नहीं, बल्कि एक सुनियोजित और क्रूर कृत्य था, जिसने समाज की अंतरात्मा को झकझोर दिया।


56 दिन में फैसला, ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ करार
12 नवंबर को आरोप तय होने के बाद मुकदमे की सुनवाई शुरू हुई। कुल 56 दिनों तक चली सुनवाई में 10 अहम गवाह पेश किए गए, जिनमें डॉक्टरों का पैनल, फॉरेंसिक विशेषज्ञ और विवेचक शामिल रहे। बचाव पक्ष ने सबूतों की कमी का तर्क दिया, लेकिन अदालत ने सभी दलीलों को खारिज कर दिया। सरकारी अधिवक्ता ने इसे ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ मामला बताते हुए कहा कि मासूम बच्ची के साथ की गई दरिंदगी के लिए मौत की सजा ही न्यायोचित है। अदालत ने भी इस तर्क से सहमति जताई और दोषी को फांसी की सजा सुनाई।


फैसले के बाद भी परिवार में दहशत
फैसले के बाद पीड़ित परिवार के चेहरों पर कुछ राहत जरूर दिखी, लेकिन डर अब भी बना हुआ है। पीड़िता की मां ने कहा कि उन्हें पूरी शांति तब मिलेगी, जब सजा पर अमल होगा। वहीं, आरोपी के पिता की कथित धमकी के बाद परिवार सहमे हुए माहौल में जी रहा है। पुलिस पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है।


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