पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर को कोर्ट से बड़ा झटका, अभी खानी पड़ेगी जेल की रोटी, जानें पूरा मामला

Curated By: shivnowup | Hindi Now Uttar Pradesh • 06 Jan 2026, 07:11 pm
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देवरिया की अदालत ने धोखाधड़ी के एक पुराने मामले में जेल में बंद पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर की जमानत याचिका खारिज कर दी। कड़ी सुरक्षा में पेशी हुई। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद राहत देने से इनकार किया।

धोखाधड़ी के एक पुराने मामले में जिला कारागार में बंद पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर को मंगलवार को अदालत से कोई राहत नहीं मिल सकी। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) की अदालत ने सुनवाई के बाद उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत के इस फैसले के बाद पूर्व आईपीएस अधिकारी को फिलहाल जेल में ही रहना होगा। मामला सामने आने के बाद से ही यह केस जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है, वहीं जमानत खारिज होने से एक बार फिर कानूनी और राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।


कड़ी सुरक्षा में अदालत में पेशी, दोनों पक्षों की दलीलें
मंगलवार को पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर को भारी पुलिस सुरक्षा के बीच जिला कारागार से दीवानी न्यायालय परिसर लाया गया। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए न्यायालय परिसर और आसपास अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था। उन्हें सीजेएम न्यायालय में पेश किया गया, जहां उनकी जमानत याचिका पर विस्तार से सुनवाई हुई। इस दौरान विवेचक भी अदालत में मौजूद रहे। पिछली तारीख पर अदालत ने विवेचक को साक्ष्यों के साथ तलब किया था। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए मामले की गंभीरता और साक्ष्यों का हवाला दिया, जबकि बचाव पक्ष ने इसे पुराना मामला बताते हुए राहत देने की मांग की। दोनों पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा और बाद में जमानत याचिका खारिज कर दी।


1999 का बताया जा रहा मामला, राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप
अमिताभ ठाकुर देवरिया में दर्ज धोखाधड़ी के जिस मामले में न्यायिक हिरासत में हैं, वह वर्ष 1999 से जुड़ा बताया जा रहा है। गिरफ्तारी के बाद से ही पूर्व आईपीएस अधिकारी की ओर से यह दावा किया जाता रहा है कि उनके खिलाफ की गई कार्रवाई राजनीतिक प्रतिशोध का नतीजा है। उनका कहना है कि लंबे समय बाद इस तरह से कार्रवाई किया जाना संदेह पैदा करता है। हालांकि अभियोजन पक्ष का तर्क है कि मामले में पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं और जांच प्रक्रिया कानून के अनुसार चल रही है। अदालत ने भी जमानत पर फैसला सुनाते हुए इन्हीं तथ्यों को ध्यान में रखा। जमानत याचिका खारिज होने के बाद न्यायालय परिसर में कुछ देर तक हलचल बनी रही और स्थानीय स्तर पर मामले को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं।


अगली कानूनी रणनीति पर नजर
जमानत याचिका खारिज होने के बाद पूर्व आईपीएस अधिकारी को कड़ी सुरक्षा के बीच वापस जिला कारागार भेज दिया गया। अब उनकी ओर से अगली कानूनी रणनीति पर काम किया जा सकता है, जिसमें उच्च अदालत में जमानत याचिका दाखिल करने की संभावना जताई जा रही है। वहीं प्रशासनिक और कानूनी जानकारों का कहना है कि यह मामला आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है। फिलहाल पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर को जेल में ही रहना होगा और मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।


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