जेल में बंद कुख्यात लेखराज की मौत, सियासी पकड़ ने बनाया था ताकतवर, भौकाल जान दंग रह जाएंगे आप!

Curated By: Shiv Vishwakarma | Hindi Now Uttar Pradesh • 27 Dec 2025, 01:27 pm
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गाजियाबाद की डासना जेल में बंद पूर्व ब्लॉक प्रमुख लेखराज यादव की दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। हत्या और गैंगस्टर एक्ट समेत दर्जनों मामलों में आरोपी लेखराज बुंदेलखंड में लंबे समय तक खौफ का नाम रहा।

झांसी के पूर्व ब्लॉक प्रमुख और हत्या, गैंगस्टर एक्ट समेत कई मामलों में गाजियाबाद की डासना जेल में बंद कुख्यात लेखराज यादव (76) की गुरुवार रात दिल्ली के डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई। जेल अफसरों के मुताबिक लेखराज लंबे समय से गंभीर बीमारियों से जूझ रहा था। अक्तूबर माह में उसे वाराणसी जेल से डासना शिफ्ट किया गया था। हालत बिगड़ने पर पहले एमएमजी अस्पताल, फिर एम्स और उसके बाद राम मनोहर लोहिया अस्पताल रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। शनिवार को उसका अंतिम संस्कार झांसी के रानीपुर कस्बा में किया जाएगा।


सियासी सरपरस्ती से बना अपराध की दुनिया का ताकतवर नाम
झांसी के रानीपुर कस्बा निवासी लेखराज यादव का नाम बुंदेलखंड में दशकों तक आतंक का पर्याय रहा। सियासी सरपरस्ती ने उसे इस कदर ताकतवर बना दिया कि कुछ ही वर्षों में वह खौफ का दूसरा नाम बन गया। समर्थक उसे लंकेश और पापाजी कहकर बुलाते थे। अपने अहाते में दरबार लगाना, फैसले सुनाना और उन्हें मनवाना उसकी पहचान बन चुकी थी। गाड़ियों के काफिले के साथ चलने वाला लेखराज छोटे-मोटे अपराधियों को जोड़कर मजबूत नेटवर्क खड़ा कर चुका था। यूपी में वारदात को अंजाम देने के बाद वह अक्सर मध्य प्रदेश में शरण लेता था। जिन लोगों के यहां वह पनाह लेता, समय आने पर उनकी मदद भी करता था। सियासी रसूख के चलते वह दो बार झांसी के बंगरा ब्लॉक का प्रमुख रहा, जबकि एक बार अपनी बहू शशि यादव को भी ब्लॉक प्रमुख बनवाया। रानीपुर नगर पंचायत में उसका बेटा भगत सिंह और पत्नी राम मूर्ति चेयरमैन रहे। जेल जाने के बाद भी पत्नी राम मूर्ति ने नगर पंचायत अध्यक्ष का चुनाव जीता।


हत्या से लेकर मुठभेड़ तक, लंबा रहा आपराधिक इतिहास
लेखराज यादव के खिलाफ झांसी समेत यूपी और मध्य प्रदेश के विभिन्न थानों में 60 से अधिक मुकदमे दर्ज थे। हत्या, हत्या के प्रयास, रंगदारी, लूट और अवैध खनन जैसे गंभीर आरोप उसके नाम से जुड़े रहे। वर्ष 2006 में तत्कालीन भाजयुमो जिलाध्यक्ष मनोज श्रोत्रिय समेत चार लोगों की सरेआम हत्या ने पूरे इलाके को दहला दिया था। इस मामले में वर्ष 2019 में दस्यु उन्मूलन विशेष कोर्ट ने लेखराज और उसके आठ गुर्गों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। उसके बेटे और सहयोगियों पर भी दर्जनों मुकदमे दर्ज हैं। मुठभेड़ से जुड़ी वायरल ऑडियो क्लिप ने भी एक समय पूरे यूपी में हंगामा मचा दिया था, जिसमें पुलिस और लेखराज के बीच बातचीत सामने आई थी। इसके अलावा 2022 में उसे छुड़ाने के लिए झांसी में पुलिस काफिले पर हमले का मामला भी दर्ज हुआ था। ऐसे लंबे और खौफनाक आपराधिक इतिहास के साथ लेखराज यादव का अध्याय अब खत्म हो गया है।

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