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Shiv Vishwakarma |
Hindi Now Uttar Pradesh • 16 Dec 2025, 04:45 pm
कैराना से सांसद इकरा हसन का हिजाब को लेकर दिया गया बयान इन दिनों सोशल मीडिया पर खासा चर्चा का विषय बना हुआ है। मंगलवार को एक न्यूज़ चैनल का वीडियो वायरल हुआ, जिसमें एंकर ने देश में हिजाब को लेकर चल रही बहस पर उनसे सवाल किया। सवाल के जवाब में सांसद ने स्पष्ट कहा कि हिजाब जैसे मुद्दों को बेवजह तूल दिया जा रहा है, जबकि देश में इससे कहीं अधिक गंभीर और जरूरी समस्याएं मौजूद हैं, जिन पर सरकार और मीडिया को ध्यान देना चाहिए।
इकरा हसन ने कहा कि हिजाब पहनना या न पहनना किसी भी महिला की निजी पसंद और इच्छा का मामला है। इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जोड़कर देखा जाना चाहिए, न कि राजनीतिक या वैचारिक विवाद के रूप में। उन्होंने दो टूक कहा कि यह फैसला पूरी तरह संबंधित महिला पर छोड़ देना चाहिए और समाज या व्यवस्था को इसमें दखल नहीं देना चाहिए। उनके अनुसार, यदि किसी महिला को हिजाब पहनने या न पहनने के लिए मजबूर किया जाता है, तो वह लोकतांत्रिक व्यवस्था के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।
हिजाब के विषय में बार-बार बहस करना सही नहीं, असली मुद्दों से भटकता है ध्यान
सांसद ने महिलाओं की आजादी पर जोर देते हुए कहा कि बार-बार ऐसे विषयों पर बहस करना सही नहीं है। इससे असली मुद्दों से ध्यान भटकता है। सांसद ने अंतरराष्ट्रीय उदाहरणों का जिक्र करते हुए कहा कि कई देशों में इस तरह के मुद्दों को अनावश्यक बहस का विषय नहीं बनाया जाता, बल्कि वहां शिक्षा, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा जैसे अहम सवालों पर गंभीरता से चर्चा होती है।
सामाजिक परंपरा का हिस्सा है हिजाब, मर्जी है तो अपनाएं महिलाएं, थोपना उचित नहीं
संस्कृति और परंपरा के संदर्भ में इकरा हसन ने कहा कि वह स्वयं एक मुस्लिम महिला हैं और ऐसे इलाके से आती हैं, जहां विभिन्न समुदायों की महिलाएं सिर ढकती हैं। यह वहां की सामाजिक और सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा है, लेकिन इसे किसी पर थोपना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि परंपराओं का सम्मान होना चाहिए, पर व्यक्तिगत फैसलों में दबाव नहीं डाला जाना चाहिए।
सरकार और समाज के लोग वास्तविक मुद्दों पर चर्चा करें, बेफिजूल मुद्दों पर नहीं
अपने बयान के अंत में सांसद ने समाज और सरकार दोनों से अपील की कि वे वास्तविक समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करें। उन्होंने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता, युवाओं के लिए रोजगार, बढ़ती महंगाई और महिलाओं की सुरक्षा जैसे मुद्दे कहीं अधिक गंभीर हैं। इन पर ठोस चर्चा और समाधान की जरूरत है, न कि पहनावे को राजनीति और बहस का विषय बनाकर समय और ऊर्जा बर्बाद करने की।
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