सपा सांसद रामजीलाल ने आरएसएस को लेकर बोल दी ऐसी बात, जानकर आप भी कहेंगे- हंगामा तय

Curated By: Shiv Vishwakarma | Hindi Now Uttar Pradesh • 16 Dec 2025, 02:31 pm
news-banner

आगरा के सपा सांसद रामजीलाल सुमन ने आरएसएस और बीजेपी पर एक बार फिर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि आरएसएस अंग्रेजो के गुलाम थे। उन्होंने गद्दारी की है। आइए खबर में पूरा बयान जानते हैं।

सपा सांसद रामजीलाल सुमन ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोला है। संसद के शीतकालीन सत्र में भाग लेने के बाद दिल्ली से आगरा लौटते समय उन्होंने कहा कि RSS और BJP का देश के राष्ट्रीय आंदोलन से कोई लेना-देना नहीं रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि आज़ादी के संघर्ष के दौरान ये संगठन अंग्रेजों के गुलाम थे और क्रांतिकारियों के खिलाफ खड़े नजर आते थे।


रामजीलाल सुमन ने कहा कि जब देश के क्रांतिकारी अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष कर रहे थे, जेलों में यातनाएं झेल रहे थे और अपनी जान की आहुति दे रहे थे, तब RSS और उससे जुड़े लोग कहीं नजर नहीं आए। उनका आरोप था कि उस दौर में जब भारत माता की जय और वंदे मातरम् के नारे लगाने वाले युवाओं को गोलियों से भून दिया जाता था या उनकी बर्बर पिटाई की जाती थी, तब ये संगठन अत्याचार करने वालों के साथ खड़े थे। इसी कारण उन्होंने इन्हें अंग्रेजों का गुलाम और गद्दार करार दिया।


सपा सांसद ने संसद में वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने पर कराई गई चर्चा पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् पहले से ही देश का राष्ट्र गीत है, जिसे संविधान सभा ने स्वीकार किया था। कांग्रेस के अधिवेशनों में यह गीत गाया जाता रहा है, लेकिन RSS और BJP का इससे क्या संबंध है, यह स्पष्ट किया जाना चाहिए। सुमन ने कहा कि उन्हें समझ नहीं आता कि किस उद्देश्य से संसद में इस विषय पर चर्चा कराई गई।


उन्होंने दो टूक कहा कि वंदे मातरम् और राष्ट्रीय आंदोलन से वही लोग जुड़े रहे हैं, जिन्होंने देश की आज़ादी के लिए बलिदान दिया। जिनका राष्ट्रीय आंदोलन से कोई संबंध नहीं रहा, वे आज जानबूझकर लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। सुमन ने दोहराया कि RSS और BJP का वंदे मातरम् से कोई रिश्ता नहीं है। अपने बयान के अंत में सपा सांसद ने देश के सामने वैचारिक सवाल भी रखे। उन्होंने कहा कि अब यह तय होना चाहिए कि देश के लिए गांधी का रास्ता सही था या नेहरू का, लोहिया का रास्ता सही था या जयप्रकाश नारायण का, गोलवलकर का रास्ता सही था या सावरकर का। उनके अनुसार, जिन लोगों का राष्ट्रीय आंदोलन से वास्तविक संबंध रहा है, वही देशभक्ति और राष्ट्रवाद की बात करने के अधिकारी हैं।


यह भी पढ़ें- यूपी में बढ़ी राजनीतिक हलचल, नया अध्यक्ष मिलने के बाद अब होने वाला है ये बड़ा बदलाव!

advertisement image